मोतिहारी में LPG संकट की भयावह तस्वीर: गैस सिलेंडर के लिए सड़क किनारे मच्छरदानी लगाकर रात गुजार रहे लोग, प्रशासन के दावों पर उठे सवाल

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मोतिहारी (पूर्वी चंपारण):

बिहार के मोतिहारी जिले से रसोई गैस (LPG) की किल्लत और कथित कालाबाजारी की ऐसी चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जिले के पताही इलाके में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर पाने के लिए रात भर गैस एजेंसी के बाहर सड़क किनारे डेरा डालकर सोना पड़ रहा है। यह स्थिति न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि आम लोगों की मजबूरी और व्यवस्था की विफलता को भी उजागर करती है।

पताही से सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि गैस एजेंसी के बाहर का दृश्य किसी अस्थायी शरणार्थी शिविर जैसा प्रतीत हो रहा है। कई उपभोक्ता रात के अंधेरे में ही अपने खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी के बाहर पहुंच जाते हैं और सुबह लाइन में आगे रहने के लिए वहीं मच्छरदानी लगाकर सो जाते हैं। जिनके पास मच्छरदानी की सुविधा नहीं है, वे पूरी रात मच्छरों के बीच खुले आसमान के नीचे समय बिताने को मजबूर हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपभोक्ताओं को अपने खाली सिलेंडरों की सुरक्षा के लिए उन्हें लोहे की सिक्कड़ और ताले से बांधकर रखना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर चोरी या छीना-झपटी की आशंका के कारण लोग रात भर जागकर पहरा देते नजर आ रहे हैं। एक सिलेंडर पाने के लिए इस तरह की परेशानी आम नागरिकों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कष्टदायक साबित हो रही है।

उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत गैस बुकिंग की तकनीकी व्यवस्था और वितरण प्रणाली को लेकर है। कई लोगों का कहना है कि मोबाइल पर गैस बुकिंग का ओटीपी तो मिल जाता है, लेकिन जब वे एजेंसी पर पहुंचते हैं, तो स्टॉक खत्म होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। इससे लोगों में भारी नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है।

पताही के बुजुर्ग उपभोक्ता राजाराम कुमार ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि गैस नहीं मिलने के कारण उनके घर का चूल्हा ठंडा पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके पास मच्छरदानी भी नहीं है, फिर भी गैस मिलने की उम्मीद में रात भर एजेंसी के बाहर ही पड़े रहना पड़ता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई थी।

इधर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी भी तेज हो गई है। सरकारी दर पर सिलेंडर नहीं मिलने से मजबूर होकर कुछ लोग ऊंचे दामों पर गैस खरीदने को विवश हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का यह भी आरोप है कि गैस की आपूर्ति को जानबूझकर प्रभावित किया जा रहा है ताकि कालाबाजारी करने वालों को फायदा मिल सके।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि जिले में गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है, तो आखिर लोग रात में गैस एजेंसी के बाहर मच्छरदानी लगाकर क्यों सोने को मजबूर हैं? क्या आम जनता यूं ही सड़क किनारे रात बिताने का जोखिम उठाएगी?

पताही से सामने आई ये तस्वीरें साफ संकेत दे रही हैं कि जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दावों के बीच बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब ठोस कदम उठाता है और आम लोगों को इस परेशानी से राहत दिलाने में कितना सफल हो पाता है।