मोतिहारी में बच्चों की तस्करी के आरोप पर नया मोड़, अभिभावकों ने कहा– “हमारी सहमति से बच्चों को घर पहुचाने ले जा रहे थे फोंन्सिस किसपोटा”

70

मोतिहारी रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी थाना में दर्ज कथित बाल तस्करी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। परियोजना पदाधिकारी शिव पूजन कुमार द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर जीआरपी थाना में कांड संख्या 14/26 दर्ज कर फोंन्सिस किसपोटा नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया । उन पर आरोप लगाया गया था कि वे 21 बच्चों को बहला-फुसलाकर 9 मई 2026 को भागलपुर लेकर जा रहे थे।

मामले में कार्रवाई करते हुए  चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने सभी बच्चों को अपने संरक्षण में ले लिया। इनमें से 3 बच्चों को बड़ा बड़ियारपुर केंद्र में रखा गया, जबकि बाकी 18 बच्चों को बेतिया कुमारबाग स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन सेंटर के सुपुर्द किया गया। घटना के बाद बच्चों के परिजन अपने बच्चों से मिलने के लिए लगातार परेशान और बेचैन दिखे।

इसी बीच सोमवार, 11 मई 2026 को जिला प्रशासन की एक उच्चस्तरीय टीम ने पूरे मामले की जांच को लेकर उस स्थल का निरीक्षण किया, जहां फोंन्सिस किसपोटा बच्चों को रखकर पढ़ाई करवाते थे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल , पुलिस अधीक्षक  स्वर्ण प्रभात, सदर-1 डीएसपी दिलीप कुमार , नगर निगम आयुक्त आशीष कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बच्चों के अभिभावकों से सीधा संवाद किया और पूछा कि क्या उनके बच्चे उनकी सहमति से फोंन्सिस किसपोटा के पास रहकर पढ़ाई करते थे। इस पर सभी अभिभावकों ने एक स्वर में प्रशासन को बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी और सहमति से बच्चों को शिक्षा के लिए फोंन्सिस किसपोटा के पास भेजा था।

अभिभावकों का कहना था कि उनके गांवों में बेहतर शिक्षा की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, इसलिए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए उन्हें पढ़ने के लिए बाहर भेजा गया था। परिजनों ने यह भी कहा कि 9 मई को फोंन्सिस किसपोटा बच्चों को उनके घर छोड़ने के लिए ले जा रहे थे, तभी रास्ते में मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ  द्वारा उन्हें रोक लिया गया और बाद में उन पर बच्चों की तस्करी का आरोप लगा दिया गया।

मौके पर मौजूद कई अभिभावकों ने प्रशासन के समक्ष यह भी कहा कि फोंन्सिस किसपोटा लंबे समय से बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे थे और उन्होंने कभी किसी बच्चे के साथ गलत व्यवहार नहीं किया। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए बच्चों को जल्द उनके परिवारों को सौंपने की अपील की।

घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अभिभावकों के बयान से मामला अब पूरी तरह  सुलझा हुआ दिखाई दे रहा है। फिलहाल पुलिस एवं जिला प्रशासन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच में जुटा हुआ है।