मोतिहारी में फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का सनसनीखेज खेल: एक ही घटना में दो अलग-अलग इंज्यूरी रिपोर्ट, 6 महीने जेल में रहा निर्दोष युवक—डॉक्टर समेत आधा दर्जन पर FIR

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मोतिहारी जिले से स्वास्थ्य विभाग और कानून व्यवस्था के मेलजोल से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केसरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तत्कालीन प्रभारी डॉ. दशरथ ठाकुर द्वारा एक ही मारपीट की घटना में दो अलग-अलग और विरोधाभासी इंज्यूरी रिपोर्ट तैयार करने का मामला उजागर हुआ है। इस फर्जीवाड़े के कारण एक युवक को करीब 6 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, पहली मेडिकल रिपोर्ट में घायल व्यक्ति के जख्म को “साधारण” बताया गया था, जबकि उसी तारीख की दूसरी रिपोर्ट में उसी चोट को “शार्प कटिंग, ग्रिवियस एंड डेंजरस टू लाइफ” यानी गंभीर और जानलेवा घोषित कर दिया गया। इस विरोधाभासी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी बनाए गए इमरान को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जहां उसे करीब छह महीने तक रहना पड़ा।

जेल से बाहर आने के बाद पीड़ित इमरान ने न्याय की गुहार लगाते हुए जिलाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए। मेडिकल बोर्ड के सामने तत्कालीन प्रभारी डॉ. दशरथ ठाकुर ने स्वीकार किया कि उनसे दबाव और धमकी देकर गलत इंज्यूरी रिपोर्ट लिखवाई गई थी। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने इस संबंध में थाना या अपने वरीय अधिकारियों को कोई सूचना क्यों नहीं दी, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

जांच में यह भी सामने आया कि वैष्णवी जांच घर के संचालक दीपेंद्र कुमार द्वारा एक्स-रे प्लेटों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें बदलने का भी आरोप है। इस पूरे मामले में मेडिकल रिपोर्ट से छेड़छाड़ और साजिश के गंभीर संकेत मिलने के बाद पुलिस ने पीएचसी के डॉक्टर, जांच घर संचालक समेत करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

यह पूरा मामला नवंबर 2023 की एक गोलीबारी की घटना से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि केसरिया प्रमुख पति द्वारा इमरान के घर पर गोलीबारी की गई थी, जिसमें एक महिला को गोली लग गई थी। इसी दौरान सरफराज नाम का एक कथित हमलावर भी घायल हो गया था। इस घटना को लेकर इमरान के चाचा और स्थानीय मुखिया मोहिबुलाह उर्फ मुन्ना ने केसरिया थाना में केस नंबर 564/23 दर्ज कराते हुए करीब 22 लोगों को आरोपी बनाया था।

इसके बाद विरोधी पक्ष के नाज अहमद खान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए केस नंबर 568/23 दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विरोधी पक्ष ने मेडिकल टीम से मिलीभगत कर झूठी चोट की रिपोर्ट तैयार करवाई है।

इसी आरोप के आधार पर जब मामले की गहराई से जांच कराई गई, तो एक ही घटना के लिए दो अलग-अलग मेडिकल रिपोर्ट तैयार होने का मामला सामने आया। इसके साथ ही एक्स-रे प्लेट बदलने जैसी गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि भी हुई।

मोतिहारी एसपी के निर्देश पर केसरिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एसपी ने बताया कि पीड़ित इमरान के आवेदन के आधार पर कार्रवाई की गई है। आवेदन में तत्कालीन थानाध्यक्ष पर भी आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है।

इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और न्याय व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर आगे की कार्रवाई पर टिकी है कि दोषियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।