गुरु पूर्णिमा महोत्सव भव्य रूप से सम्पन्न, गुरु के प्रति श्रद्धा एवं आध्यात्मिक चेतना का संदेश

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वीरगंज, श्रावण १३ बृहस्पति फाउंडेशन नेपाल के आयोजन में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को वीरगंज स्थित माइस्थान मंदिर पार्क में भव्य “गुरु पूर्णिमा महोत्सव–२०८३” श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।

गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान तथा आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तित्वों, धर्मप्रेमियों, समाजसेवियों, शिक्षकों, पत्रकारों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन बृहस्पति फाउंडेशन नेपाल के अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने किया। समारोह की अध्यक्षता भोजपुरी समाज वीरगंज के अध्यक्ष ध्रुव सिंह ठाकुरी ने की, जबकि वरिष्ठ समाजसेवी मुरलीधर रूंगटा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उद्योगपति अशोक वैद्य, शिक्षाविद् राजेन्द्र सिंह, प्याब्सन पर्सा के जिला अध्यक्ष सरोज प्रसाद, एन–प्याब्सन वीरगंज नगर अध्यक्ष जियालाल गुप्ता, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश शर्मा, समाजसेवी प्रकाश उपाध्याय, डॉ. अनिल झा, गहवामाई तीर्थ क्षेत्र विकास समिति के सचिव पप्पू गुप्ता सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व एवं बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।

महोत्सव में प्रसिद्ध गायक एवं कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन तथा भक्तिमय सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक हो उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु के महत्व, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा आध्यात्मिक जीवनशैली पर प्रेरणादायक संदेश भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर शिक्षा, पत्रकारिता, सामाजिक सेवा तथा अन्य विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को अंगवस्त्र (खादा) ओढ़ाकर एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इन सम्मानित व्यक्तित्वों का योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम में बृहस्पति फाउंडेशन नेपाल के सह-कोषाध्यक्ष चन्दन प्रजापति, धीरज साह, विभा साह, रजनीकान्त दुबे सहित अन्य पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

आयोजकों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा महोत्सव का उद्देश्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता को सुदृढ़ करना था, जो सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। महोत्सव ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को पुनः स्मरण कराते हुए समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का संदेश दिया।

अभिलाष गुप्ता कि रिपोर्ट