अरेराज में कड़ी सुरक्षा के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब, प्रशासन की मुस्तैदी से श्रद्धालु रहे निश्चिंत

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अरेराज। लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व चैती छठ के पावन अवसर पर अरेराज के विभिन्न छठ घाटों पर संध्या अर्घ्य के दौरान श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। घाटों पर हजारों की संख्या में व्रती और श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहां अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करते समय पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर नजर आया।

इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए अरेराज पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक और सुदृढ़ इंतजाम किए गए थे। सभी प्रमुख छठ घाटों पर पुलिस बल की सघन तैनाती की गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सुव्यवस्थित व्यवस्था बनी रही। प्रशासन की सक्रियता के कारण श्रद्धालुओं ने पूरी निश्चिंतता और श्रद्धा के साथ भगवान सूर्य की उपासना की।

थानाध्यक्ष प्रत्याशा कुमारी स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले लगातार विभिन्न घाटों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण करती रहीं। उनके नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीमें लगातार गश्ती करती दिखीं, जिससे हर गतिविधि पर सतर्क नजर बनाए रखी जा सकी। इस दौरान एसआई अविनाश कुमार सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी पूरी मुस्तैदी के साथ अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते नजर आए।

भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष रणनीति अपनाई गई थी। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई, वहीं यातायात संचालन को भी व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा घेरा और निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी ढंग से लागू रही।

प्रशासन की प्राथमिकता रही कि व्रतियों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा पर्व पूरी गरिमा और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हो सके। इसके लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

छठ घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों की मधुर ध्वनि और भगवान सूर्य की आराधना का दृश्य पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरता हुआ नजर आया।

पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे शांति और अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासन का सहयोग करें, ताकि आस्था और सामाजिक सौहार्द का यह महान पर्व इसी तरह श्रद्धा, सुरक्षा और उल्लास के साथ संपन्न होता रहे।