थानों की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी नगर थाने के 1,615 लंबित कांडों की समीक्षा खुद करेंगे एसपी स्वर्ण प्रभात,

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मोतिहारी। बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) पुलिस ने लंबित कांडों के त्वरित निष्पादन और थाना कार्यों की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसके तहत जिले के विभिन्न थानों को वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारियों द्वारा “गोद” लिया गया है, ताकि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, कानून-व्यवस्था की निगरानी, जन शिकायतों का समाधान और आधारभूत सुविधाओं का मूल्यांकन प्रभावी ढंग से किया जा सके।

जानकारी के अनुसार, जिले में सर्वाधिक लंबित कांड वाले थानों को प्राथमिकता देते हुए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। तुरकौलिया थाना में वर्तमान में 890 लंबित मामले दर्ज हैं, जिनकी समीक्षा और त्वरित निष्पादन की जिम्मेदारी सदर एसडीपीओ-1 दिलीप कुमार को सौंपी गई है। वे लंबित कांडों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था, जन शिकायतों और थाना स्तर की आधारभूत व्यवस्थाओं की भी नियमित निगरानी करेंगे।

वहीं हरसिद्धि थाना में 1,044 लंबित मामलों के निष्पादन के लिए अरेराज डीएसपी रवि राज को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह मुफस्सिल थाना में 1,085 लंबित कांडों की समीक्षा और निष्पादन की कमान एसडीपीओ-2 जितेश पांडे को सौंपी गई है।

सबसे अधिक चिंता का विषय मोतिहारी नगर थाना है, जहां जिले के सभी थानों की तुलना में 1,615 लंबित मामले दर्ज हैं। इन मामलों की समीक्षा और त्वरित निष्पादन की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने स्वयं अपने हाथों में ली है। माना जा रहा है कि यह कदम लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे और पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पुलिस मुख्यालय की इस पहल का मुख्य उद्देश्य थानों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, मामलों के निष्पादन में तेजी लाना, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना तथा आम जनता का पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास सुदृढ़ करना है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा से न केवल लंबित मामलों में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि थाना स्तर पर जवाबदेही भी बढ़ेगी।

जिले में बढ़ते लंबित कांडों को देखते हुए यह व्यवस्था पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में सुधार और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी से लंबित मामलों के निष्पादन में कितनी तेजी आती है और इसका आम जनता को कितना लाभ मिलता है।