अरेराज अनुमंडल के वासियों को स्थानीय स्तर पर न्याय व्यवस्था की सौगात देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सरगर्मी बढ़ गई है। यहां प्रस्तावित व्यवहार न्यायालय के निर्माण को लेकर आज पूर्वी चंपारण के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से अरेराज नगर क्षेत्र का दौरा किया और चयनित भूमि का भौतिक सत्यापन किया।
इस उच्चस्तरीय निरीक्षण के दौरान स्थानीय अनुमंडल पदाधिकारी और अंचल अधिकारी ने वरीय अधिकारियों को प्रस्तावित भूखंड के नक्शे, स्वामित्व और वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी दी। मौके पर मौजूद आला अधिकारियों ने जमीन के कुल रकबे, मुख्य सड़क से कनेक्टिविटी, भौगोलिक बनावट, सीमांकन और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी व तकनीकी बिंदुओं की गहन समीक्षा की। अधिकारियों ने इस बात का भी आकलन किया कि भविष्य में कोर्ट परिसर के विस्तार के लिहाज से यह जगह कितनी अनुकूल रहेगी।
निरीक्षण के उपरांत जिला जज और जिलाधिकारी ने संबंधित अंचल और अनुमंडल स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि भूमि अर्जन और प्रशासनिक स्वीकृतियों से संबंधित जो भी कागजी प्रक्रियाएं शेष हैं, उन्हें पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार अविलंब पूरा किया जाए, ताकि निर्माण कार्य को जल्द से जल्द हरी झंडी मिल सके।
विदित हो कि मोतिहारी सदर अनुमंडल के अतिरिक्त जिले के सभी पांच अनुमंडलों—अरेराज, रक्सौल, ढाका, चकिया और पकड़ीदयाल में अनुमंडल न्यायालयों का निर्माण किया जाना है। मानक के अनुसार प्रत्येक न्यायालय परिसर के सुचारू संचालन और आवासीय क्वार्टरों के लिए करीब छह एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई है। इसी योजना के अंतर्गत अरेराज में भूमि को अंतिम रूप देने के लिए यह प्रशासनिक कवायद की गई है।
अरेराज में व्यवहार न्यायालय के शुरू होने से न केवल स्थानीय अधिवक्ताओं को कार्य करने का एक बेहतर मंच मिलेगा, बल्कि आम जनता को भी छोटे-बड़े मुकदमों के लिए जिला मुख्यालय मोतिहारी के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर कोर्ट की उपलब्धता से लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी और न्याय प्रणाली अधिक सुलभ हो सकेगी।










