स्वार्थ की हवा में बदलते चेहरे, सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं सच्चे इंसान

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रक्सौल पूर्वी चंपारण, विमल सराफ

मतलब के रिश्ते परिस्थितियों के साथ बदल जाते हैं, लेकिन सच्चे रिश्तों की पहचान कठिन समय में भी साथ निभाने से होती है। इंसान की असली पहचान उसके स्वार्थ से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, चरित्र और व्यवहार से होती है।

दुनिया में इंसानों की कमी नहीं है, लेकिन सच्चे और भरोसेमंद लोगों की पहचान करना आसान नहीं है। कुछ लोग अपने सिद्धांतों और रिश्तों के प्रति हमेशा ईमानदार रहते हैं, जबकि कुछ लोग अपने फायदे के अनुसार रंग और व्यवहार बदलते रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए एक कहावत बिल्कुल सही बैठती है कि मतलबी इंसान और धूल में कोई खास फर्क नहीं होता, दोनों हवा का रुख देखकर अपनी दिशा बदल लेते हैं।

मतलबी इंसान का साथ अक्सर तब तक रहता है, जब तक उसे कोई लाभ मिलता रहता है। जैसे ही उसका स्वार्थ पूरा हो जाता है या परिस्थितियाँ बदलती हैं, उसका व्यवहार भी बदल जाता है। जो व्यक्ति कभी अपना होने का दावा करता था, वही जरूरत पड़ने पर अनजान बन जाता है। ऐसे लोग रिश्तों की कीमत भावनाओं से नहीं, बल्कि अपने फायदे और नुकसान से तय करते हैं।

वास्तव में स्वार्थ इंसान की सोच को इतना छोटा बना देता है कि वह रिश्तों में अपनापन, विश्वास और इंसानियत का महत्व भूल जाता है। उसे व्यक्ति नहीं, बल्कि उससे मिलने वाला लाभ दिखाई देता है। ऐसे लोग अच्छे समय में आसपास भीड़ लगाकर रखते हैं, लेकिन मुश्किल समय में सबसे पहले दूरी बना लेते हैं।

लेकिन यह भी जीवन की एक सच्चाई है कि हर बदलती परिस्थिति में अपना व्यवहार बदल लेना समझदारी नहीं होती। समय के अनुसार निर्णय लेना अलग बात है और अपने स्वार्थ के लिए सिद्धांतों तथा रिश्तों को छोड़ देना बिल्कुल अलग बात है। समझदार व्यक्ति परिस्थितियों से सीखता है, लेकिन अपना चरित्र नहीं बेचता।

इंसान की असली पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा, धन या मीठी बातों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वह विपरीत परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करता है। जो व्यक्ति कठिन समय में भी अपने परिवार, मित्रों और अपनों का साथ नहीं छोड़ता, वही वास्तव में भरोसे के योग्य होता है।

हमें जीवन में ऐसे लोगों से नफरत करने के बजाय उनसे सावधान रहना चाहिए। हर किसी पर आंख बंद करके विश्वास करना भी उचित नहीं है। विश्वास जरूर करें, लेकिन व्यक्ति के शब्दों से अधिक उसके कर्मों और व्यवहार को महत्व दें। क्योंकि मीठी बातें करने वाले बहुत मिल जाते हैं, लेकिन मुश्किल समय में साथ निभाने वाले बहुत कम होते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि हमें दूसरों की स्वार्थी प्रवृत्ति की आलोचना करने के साथ-साथ स्वयं को भी परखना चाहिए। हमारा व्यवहार किसी के पद, पैसे, प्रभाव या जरूरत के अनुसार नहीं बदलना चाहिए। यदि हम किसी के साथ हैं, तो ईमानदारी से रहें और यदि किसी बात से असहमत हैं, तो भी सम्मान बनाए रखें।

हवा का रुख बदलने पर धूल उड़कर इधर-उधर चली जाती है, लेकिन मजबूत वृक्ष अपनी जड़ों के सहारे हर मौसम का सामना करता है। मनुष्य को भी ऐसा ही बनना चाहिए। समय के साथ अपनी सोच को बेहतर बनाएं, अपनी गलतियों को सुधारें, लेकिन अपने संस्कार, ईमानदारी और आत्मसम्मान से कभी समझौता न करें।

क्योंकि स्वार्थ से जुड़े लोग लाभ समाप्त होते ही दूर हो जाते हैं, लेकिन विश्वास, प्रेम और सिद्धांतों से जुड़े रिश्ते कठिन से कठिन समय में भी कायम रहते हैं। याद रखिए, हवा के साथ उड़ने वाले बहुत मिलेंगे, मगर तूफान में भी जड़ें थामकर खड़े रहने वाले ही जीवन में सच्चे और सम्मान के योग्य कहलाते हैं।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल, डिस्ट्रिक्ट 322ई,जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् ,रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।