विश्व शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शिक्षक संतोष कुमार तिवारी ‘संभावना’ मंच द्वारा सम्मानित

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22 वर्षों के बेमिसाल शैक्षणिक व सामाजिक योगदान के लिए मिला ‘शिक्षक सम्मान’

अरेराज (पूर्वी चंपारण): विश्व शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘संभावना’ द्वारा आयोजित एक गरिमामय समारोह में राजकीय मध्य विद्यालय झखरा (अरेराज) के प्रखंड शिक्षक एवं राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर संतोष कुमार तिवारी को ‘शिक्षक सम्मान’ से अलंकृत किया गया। समारोह में संस्था के अध्यक्ष भरत प्रसाद गुप्त, सहअध्यक्ष शिवपूजन प्र. गुप्ता, संगठन मंत्री रवीन्द्र मिश्र, कार्यक्रम प्रभारी भैरव प्र. गुप्ता एवं रमेश प्र. गुप्ता ने संयुक्त रूप से उन्हें अंगवस्त्र तथा विशेष प्रशस्ति-पत्र भेंटकर सम्मानित किया। वक्ताओं ने उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संतोष तिवारी ने तन-मन-धन से शिक्षत्व को अंगीकार कर समाज और शिक्षा के उत्थान के लिए अनुकरणीय कार्य किया है।

संकल्प और संघर्ष से बदला विद्यालय का परिदृश्य

27 मार्च 2004 को मात्र 18 वर्ष 10 माह की आयु में शिक्षामित्र के रूप में अपनी सेवा शुरू करने वाले संतोष कुमार तिवारी का 22 वर्षों का सेवाकाल मिसाल रहा है। सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने विद्यालय के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किया। उनके अथक प्रयासों से विद्यालय में 7 नवीन कक्षा-कक्षों, प्रधानाध्यापक कक्ष, बालिका शौचालय तथा किचेन शेड का निर्माण संभव हो सका। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों को शिक्षा से जोड़कर उन्होंने विद्यालय को माध्यमिक स्तर तक उत्क्रमित कराने में मुख्य भूमिका निभाई और भूमि की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई।

शिक्षकों के अभाव में भी नहीं रुकने दी पढ़ाई

हाई स्कूल उत्क्रमण के बाद लगभग छह वर्षों तक माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति न होने के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी। उनके कुशल मार्गदर्शन के बदौलत छात्रों ने अनुमंडल व जिला स्तर की शैक्षणिक, सांस्कृतिक व खेलकूद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट सफलता हासिल की।

उच्च योग्यता, नवाचार और सामाजिक सरोकार

सेवाकाल के दौरान ही एम.ए., बी.एड. एवं डी.एल.एड. की डिग्रियां प्राप्त करने वाले संतोष तिवारी राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर, वीएसएस ट्रेनर, संकुल समन्वयक, टीएआरएल तथा एनआईओएस के माध्यम से अन्य शिक्षकों के क्षमता-विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं। इसके साथ ही, बी.एल.ओ. के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के अलावा वे गरीब व जरूरतमंद बच्चों का परीक्षा पंजीकरण व अन्य प्रपत्र निःशुल्क भरकर आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की मदद करते हैं।

निष्ठा और ईमानदारी से काम करना ही असली पहचान

सम्मान प्राप्त करने के उपरांत संतोष कुमार तिवारी ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिना किसी बड़ी पहचान की प्रतीक्षा किए, अपने हिस्से का काम ईमानदारी और पूरी निष्ठा से करते रहना ही एक शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने इस सम्मान का श्रेय अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं, सहकर्मियों, अभिभावकों और क्षेत्र की जनता के विश्वास व सहयोग को दिया। इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।