पिपराकोठी में जिला स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ

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पूर्वी चंपारण के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पिपराकोठी में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत प्राकृतिक खेती सम्मेलन-सह-शारदीय खरीफ महाभियान-2026 की जिला स्तरीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराना, प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक बनाना तथा आगामी खरीफ मौसम के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन

कार्यक्रम का उद्घाटन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद, मोतिहारी सांसद राधामोहन सिंह, विधायक प्रमोद कुमार, कृष्णनंदन पासवान, शालिनी मिश्रा, श्याम बाबू प्रसाद सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. अनिल कुमार, कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक तथा जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 200 से अधिक किसान उपस्थित रहे।

प्राकृतिक खेती समय की जरूरत: मंत्री

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी, जल और पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। साथ ही राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती का तालमेल जरूरी

मोतिहारी सांसद राधामोहन सिंह ने कहा कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को भी अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और किसानों को अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। सांसद ने किसानों से कृषि विज्ञान केंद्र से लगातार जुड़े रहने तथा नई तकनीकों को अपनाने की अपील की।

खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य

कृषि विज्ञान केंद्र, पिपराकोठी के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. अनिल कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है, उत्पादन लागत घटती है तथा खेतों की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इससे खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनती है।

खरीफ 2026 के लिए मिला विशेष प्रशिक्षण

डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि शारदीय खरीफ महाभियान-2026 के तहत किसानों को धान, मक्का, दलहन और तिलहन की नई एवं उन्नत किस्मों की जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा जीवामृत, बीजामृत और प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले अन्य जैविक उत्पादों को तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।

रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर वैज्ञानिकों की चेतावनी

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती को इसका प्रभावी विकल्प बताते हुए कहा कि गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन से तैयार जीवामृत एवं बीजामृत मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं और फसलों की प्राकृतिक वृद्धि में सहायक साबित होते हैं।

किसानों को दी गई आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी

कार्यशाला में किसानों को शारदीय खरीफ मौसम के लिए धान की सीधी बुआई, श्री विधि (SRI), जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा समेकित कीट प्रबंधन (IPM) की विस्तृत जानकारी दी गई।

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर बुआई, वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग और संतुलित कृषि प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी उत्पादकता और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रखंडों से आए प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कई किसानों ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी खेती की लागत में कमी आई है और फसलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

किसानों ने इसे भविष्य की टिकाऊ खेती बताते हुए अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।

साहित्य वितरण और मिट्टी जांच पर जोर

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रतिभागी किसानों के बीच प्राकृतिक खेती एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से संबंधित साहित्य का वितरण भी किया गया।

वैज्ञानिकों ने किसानों को नियमित रूप से मिट्टी जांच कराने तथा उसी के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और उत्पादन बेहतर हो सके।हैं

हर बुधवार होगी किसान गोष्ठी

कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि पिपराकोठी स्थित केंद्र में प्रत्येक बुधवार किसान गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। यहां किसान अपनी कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त कर सकते हैं और नई तकनीकों की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं।

किसानों के लिए नई उम्मीद

खेत बचाओ अभियान’ और शारदीय खरीफ महाभियान-2026 के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्वी चंपारण के किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो न केवल मिट्टी और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि किसानों की उत्पादन लागत घटेगी, आय में स्थायी वृद्धि होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए टिकाऊ कृषि व्यवस्था का मजबूत आधार भी तैयार होगा।