30 साल का इंतजार: अपनी ही जमीन के लिए दर-दर भटक रही हेमा रानी, न्याय की आस में प्रशासन से गुहार

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मोतिहारी/पिपराकोठी। पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी प्रखंड में भूमि विवाद का एक मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक महिला पिछले तीन दशकों से अपनी वैधानिक जमीन पर अधिकार और कब्जा पाने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल सका है। मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि जिले में लगातार बढ़ रहे भूमि विवादों की गंभीरता को भी उजागर कर रहा है।

पीड़िता हेमा रानी देवी ने बताया कि करीब 30 वर्ष पूर्व उनकी शादी मोतिहारी शहर के छतौनी थाना क्षेत्र स्थित बंगाली कॉलोनी निवासी टूना प्रसाद के साथ हुई थी। उनके अनुसार, विवाह के समय उनके पिता फेलु दास ने 18 हजार रुपये देकर पिपराकोठी थाना क्षेत्र में स्थित लगभग 30 कट्ठा जमीन जरपेशगी के रूप में दि थी। यह जमीन देव कर्मकार और मनोज कर्मकार को दि गई थी।

12 लाख रुपये की मांग का आरोप, कब्जा देने से इनकार

हेमा रानी देवी का आरोप है कि वर्तमान में संबंधित पक्ष जमीन पर उनके अधिकार को स्वीकार नहीं कर रहा है। जब भी वह जमीन पर कब्जा लेने या अपने हक की बात करती हैं, तब उनसे जमीन छोड़ने के बदले 12 लाख रुपये की मांग की जाती है।

उन्होंने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह इतनी बड़ी रकम का भुगतान कर सकें। इसी कारण वह वर्षों से मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। उनका कहना है कि बार-बार अनुरोध और प्रयास के बावजूद उन्हें अपनी जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है।

अंचल कार्यालय की जांच में अधिकार की पुष्टि का दावा

पीड़िता का दावा है कि पिपराकोठी अंचल कार्यालय द्वारा मामले की जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान यह स्पष्ट पाया गया कि संबंधित जमीन पर उनका वैधानिक अधिकार बनता है। हेमा रानी देवी के अनुसार, अंचलाधिकारी स्तर पर भी इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि जमीन की वास्तविक हकदार वही हैं और उन्हें मालिकाना हक मिलना चाहिए।

इसके बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जमीन का कब्जा उन्हें नहीं मिल सका है। उन्होंने कई बार अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया।

प्रशासन से न्याय की मांग

हेमा रानी देवी ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर जल्द न्याय दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि 30 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वह अपनी वैध संपत्ति से वंचित हैं।

भूमि विवाद बन रहे अपराध और तनाव की वजह

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि पूर्वी चंपारण सहित बिहार के कई जिलों में भूमि विवाद सामाजिक तनाव और आपराधिक घटनाओं का प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। समय पर निष्पादन नहीं होने से ऐसे मामले वर्षों तक लंबित रहते हैं, जिससे विवाद और गहरा हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूमि संबंधी मामलों का त्वरित और निष्पक्ष समाधान किया जाए, तो न केवल पीड़ितों को राहत मिलेगी बल्कि कानून-व्यवस्था भी मजबूत होगी। फिलहाल पिपराकोठी का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।