निजी जमीन पर चल रही दुकान पर चला प्रशासन का बुलडोजर! लाखों का नुकसान, पीड़ित दुकानदार ने लगाई न्याय की गुहार

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मोतिहारी। शहर के वार्ड संख्या 40 स्थित होमगार्ड गेट के बगल में संचालित एक इलेक्ट्रिक एवं जनरल स्टोर को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित दुकानदार दीपक कुमार, पिता जौहर शाह, ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उनकी निजी जमीन पर संचालित दुकान को पलट दिया गया, जिससे उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

निजी जमीन पर थी दुकान, फिर भी की गई कार्रवाई” : दीपक कुमार

पीड़ित दीपक कुमार का कहना है कि वह वर्षों से अपनी निजी जमीन पर इलेक्ट्रिक एवं जनरल स्टोर की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनका दावा है कि दुकान किसी सरकारी भूमि या अतिक्रमण वाली जगह पर नहीं, बल्कि उनकी निजी जमीन पर स्थापित थी। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान दुकान को पलट दिया गया और उसमें रखे गए सामान बर्बाद हो गए।

दीपक कुमार ने बताया कि दुकान में रखे इलेक्ट्रिक उपकरण, घरेलू सामान, फर्नीचर और अन्य वस्तुएं क्षतिग्रस्त हो गईं, जिसकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। उनका कहना है कि एक गरीब परिवार के लिए इतनी बड़ी क्षति की भरपाई करना बेहद मुश्किल है।

लाखों का सामान बर्बाद, परिवार पर टूटा आर्थिक संकट*

दुकानदार के अनुसार, दुकान ही उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत थी। दुकान क्षतिग्रस्त होने के बाद न केवल व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है, बल्कि परिवार के सामने दैनिक खर्च चलाने की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि दुकान में रखा अधिकांश सामान टूट-फूट गया है और कई वस्तुएं उपयोग के लायक भी नहीं बची हैं।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कार्रवाई के बाद क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। लोगों का मानना है कि यदि दुकान वास्तव में निजी जमीन पर थी तो प्रशासन को कार्रवाई से पहले संबंधित दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए थी।

प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

दीपक कुमार ने उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी जमीन निजी है और बिना उचित कारण के दुकान को नुकसान पहुंचाया गया है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं एक गरीब व्यक्ति हूं। अपनी निजी जमीन पर दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता हूं। लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। अब मैं दोबारा सामान कहां से लाऊं और दुकान कैसे शुरू करूं? प्रशासन मेरी पीड़ा को समझे और न्याय दिलाए।”

न्याय की आस में भटक रहा पीड़ित परिवार

घटना के बाद से दीपक कुमार और उनका परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर नुकसान का आकलन कराने तथा उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी अपील की है।

पीड़ित का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो उनका प्रशासन पर से विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाए।

*जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई*

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कार्रवाई किस आधार पर की गई और संबंधित जमीन की स्थिति क्या थी। हालांकि, पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में पीड़ित के दावे सही पाए जाते हैं तो यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं, निष्पक्ष जांच से ही यह तय हो सकेगा कि वास्तव में कार्रवाई उचित थी या किसी प्रकार की लापरवाही का परिणाम।