मोतिहारी से ब्यूरो रजनीश रवि की रिपोर्ट | 07 मई 2025
पूर्वी चंपारण जिले में एमडीआर टीबी (मल्टी-ड्रग-रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। अब निजी डॉक्टर भी इस गंभीर बीमारी की पहचान कर सकेंगे और मरीजों को आवश्यक इलाज के लिए रेफर कर सकेंगे। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शरण नर्सिंग होम और रहमानिया नर्सिंग होम का निरीक्षण राज्य व केंद्र की संयुक्त टीम द्वारा किया गया, जिसमें शरण नर्सिंग होम को गाइडलाइन के अनुरूप पाए जाने पर एमडीआर टीबी हब के रूप में चयनित किया गया।
आज बुधवार को इस संबंध में एक एमओयू (समझौता पत्र) डॉक्टर आशुतोष शरण और संचारी रोग पदाधिकारी डॉ संजीव के बीच संपन्न हुआ। इसके साथ ही यह नर्सिंग होम जिले में एमडीआर टीबी मरीजों की पहचान, उपचार और जागरूकता के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।
क्या है एमडीआर टीबी और क्यों है यह खतरनाक?
नोडल चिकित्सक डॉ सुनील कुमार ने बताया कि एमडीआर टीबी सामान्य टीबी का वह रूप है जिसमें सामान्य दवाएं असर नहीं करतीं। यह बीमारी गंभीर होती है और इसका इलाज लंबा तथा जटिल होता है। उन्होंने कहा, “यदि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर निजी डॉक्टर मरीजों को समय पर परीक्षण और इलाज के लिए रेफर करें, तो उनकी जान बचाई जा सकती है।”
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ संजीव ने जानकारी दी कि एमडीआर टीबी के इलाज के लिए दूसरी पंक्ति की विशेष दवाएं जरूरी होती हैं और यह प्रक्रिया आमतौर पर 18 से 24 महीने तक चलती है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी डॉक्टर इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि अधिकांश मरीज सबसे पहले निजी क्लीनिक का रुख करते हैं।
शरण नर्सिंग होम बनेगा एमडीआर टीबी हब
शरण नर्सिंग होम को एमडीआर टीबी के मरीजों की स्क्रीनिंग, परामर्श और रेफरल के लिए एक हब के रूप में चुना गया है। डॉ आशुतोष शरण ने बताया कि नर्सिंग होम में प्रशिक्षित स्टाफ, आधुनिक लैब और समुचित दवा उपलब्ध होगी। “हमारा प्रयास रहेगा कि हर मरीज को समय पर जांच, इलाज और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाएं,” उन्होंने कहा।
इस पहल से जिले में टीबी मरीजों की खोज और उनका इलाज अब और ज्यादा व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शरण नर्सिंग होम को तकनीकी सहयोग के साथ दवाएं, प्रशिक्षण और परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।
एमडीआर टीबी के प्रमुख लक्षण: दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी खांसी के साथ बलगम या खून आना भूख में कमी और वजन का लगातार गिरना शाम या रात में बुखार सर्दी में पसीना आना सांस लेते समय सीने में दर्द
इन लक्षणों की उपेक्षा जानलेवा हो सकती है। इसलिए डॉक्टरों से आग्रह किया गया है कि लक्षण दिखते ही मरीज को जांच के लिए सरकारी या चयनित निजी संस्थानों में भेजें।
समन्वय और जागरूकता बढ़ाना प्राथमिकता
डीईओ अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में एमडीआर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग भी स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय करेगा। स्कूलों और कॉलेजों में टीबी पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इस मौके पर एसटीएलएस जैनेन्द्र कुमार और ‘डॉक्टर फॉर यू’ के जिला प्रतिनिधि कावेंद्र सागर भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इस योजना से जिले में टीबी के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा मिलेगी। निजी क्षेत्र की भागीदारी से मरीजों की पहचान पहले होगी, जिससे इलाज समय पर शुरू किया जा सकेगा।
समाप्ति की ओर बढ़ती उम्मीद
पूर्वी चंपारण जैसे बड़े जिले में एमडीआर टीबी के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए यह एक सकारात्मक पहल है। विशेषज्ञों की माने तो यदि सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें, तो टीबी पर विजय पाना संभव है।
“हर एक जान कीमती है, और समय पर इलाज से टीबी को मात दी जा सकती है,” यह संदेश अब जिले के कोने-कोने तक पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है।










