सात महीने से वेतन नहीं, दिवाली-छठ से ठीक पहले नौकरी से हटाए गए ICT इंस्ट्रक्टर, शिक्षा विभाग में किया प्रदर्शन

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विस्तर विजन कंपनी के फैसले से जिले के ICT इंस्ट्रक्टरों में आक्रोश, पुनर्बहाली और बकाया वेतन भुगतान की उठाई मांग, परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट

मोतिहारी, पूर्वी चंपारण

केंद्र और राज्य सरकार जहां एक ओर युवाओं को रोजगार देने और शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ICT इंस्ट्रक्टर आज खुद बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर हैं। सात महीने तक काम कराने के बाद अचानक नौकरी से हटाए जाने के फैसले ने इन इंस्ट्रक्टरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि नौकरी से हटाने का पत्र भी ऐसे समय जारी किया गया, जब देशभर में दीपावली और छठ महापर्व की तैयारियां चल रही थीं।

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दरअसल, बिहार के विभिन्न हाई स्कूलों में विस्तर विजन कंपनी के माध्यम से ICT इंस्ट्रक्टरों की बहाली की गई थी। इन इंस्ट्रक्टरों की जिम्मेदारी स्कूलों में डिजिटल और ऑनलाइन कार्यों को संचालित करने की थी। स्कूलों से संबंधित ऑनलाइन कार्य, सरकारी पोर्टल पर डाटा अपलोड करने, विद्यार्थियों से जुड़े डिजिटल कार्यों और शिक्षा विभाग की ऑनलाइन गतिविधियों में इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। इंस्ट्रक्टरों का कहना है कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ सरकार और शिक्षा विभाग के कार्यों को पूरा करने में अपना योगदान दिया।

लेकिन गुरुवार को विस्तर विजन कंपनी की ओर से अचानक एक पत्र जारी कर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद जिले के ICT इंस्ट्रक्टरों में भारी नाराजगी देखने को मिली। विरोध जताने के लिए सभी इंस्ट्रक्टर जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए अपनी पुनर्बहाली की मांग उठाई।

सात महीने काम, लेकिन एक रुपये का वेतन नहीं!

प्रदर्शन कर रहे ICT इंस्ट्रक्टरों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनकी बहाली हुए लगभग सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस पूरी अवधि का वेतन अब तक भुगतान नहीं किया गया है। इसके बावजूद वे लगातार स्कूलों में अपनी सेवाएं देते रहे। इंस्ट्रक्टरों का आरोप है कि एक तरफ सात महीने का बकाया वेतन नहीं दिया गया और दूसरी तरफ दीपावली एवं छठ जैसे बड़े त्योहारों से महज दो दिन पहले उन्हें कार्यमुक्त करने का पत्र थमा दिया गया।

इंस्ट्रक्टरों का कहना है कि त्योहार के समय नौकरी छिन जाने से उनके परिवारों की खुशियां भी प्रभावित हुई हैं। घर चलाने, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चिंता अब उनके सामने खड़ी हो गई है।

उम्र निकलने के बाद भविष्य पर भी संकट!

प्रदर्शनकारियों ने अपनी एक और गंभीर समस्या सामने रखी। उनका कहना है कि नौकरी की उम्मीद में उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष इस काम में लगा दिए। अब उनकी उम्र भी काफी हो चुकी है, जिसके कारण दूसरी सरकारी भर्तियों में आवेदन करने के अवसर सीमित होते जा रहे हैं। ऐसे में अचानक नौकरी से हटाए जाने का फैसला उनके भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

ICT इंस्ट्रक्टरों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि उन्हें तत्काल दोबारा काम पर रखा जाए, सात महीने का लंबित वेतन भुगतान किया जाए और भविष्य में उनकी सेवा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

सरकार के रोजगार देने के दावों के बीच अब सवाल यह है कि स्कूलों की डिजिटल व्यवस्था को संभालने वाले इन ICT इंस्ट्रक्टरों के परिवारों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? क्या शिक्षा विभाग और सरकार उनकी पीड़ा सुनकर कोई ठोस निर्णय लेगी या फिर ये इंस्ट्रक्टर बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझते रहेंगे?