हैजा के खिलाफ तैयारी को मजबूत बनाने हेतु वीरगंज में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

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नेपाल संवाददाता :- अभिलाष गुप्ता कि रिपोर्ट

वीरगंज, 11 असार नारायणी अस्पताल के आयोजन तथा अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस एवं रेड क्रिसेंट महासंघ (IFRC) और नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से “स्ट्रेंथनिंग कोलेरा प्रिपेयर्डनेस: लेसन लर्न्ड वर्कशॉप” शीर्षकक दो दिवसीय कार्यशाला गुरुवार से वीरगंज में शुरू हुई है।

वीरगंज स्थित होटल क्लार्क रिसोर्ट गंडक में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य हैजा जैसे संक्रामक रोगों के संभावित जोखिम को कम करने के लिए पूर्व तैयारी को सुदृढ़ बनाना, पिछले अनुभवों एवं सीखों का आदान-प्रदान करना तथा प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए सरोकारवालों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है।

स्ट्रेंथनिंग प्रिपेयर्डनेस, शेयरिंग एविडेंस एंड सेविंग लाइव्स” के मूल नारे के साथ आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता नारायणी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट (मेसु) डॉ. चितरंजन साह ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस एवं रेड क्रिसेंट महासंघ (IFRC) के नेपाल प्रतिनिधि डेविड सियर्स उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में जिला प्रशासन कार्यालय पर्सा के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी कृष्ण थापा, नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी केन्द्रीय कार्यालय की कार्यकारी निर्देशक मोना अर्याल, नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी मधेश प्रदेश के अध्यक्ष फुल मोहम्मद मियाँ, खानेपानी तथा ढल व्यवस्थापन विभाग के प्रतिनिधि रचित ओझा, नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी के केन्द्रीय प्रतिनिधि बालकृष्ण सेढाईं, टिकाराज पौडेल तथा रश्मि झा विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागी रहे।

इसके अतिरिक्त नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी वीरगंज शाखा के सभापति बृजकिशोर पटेल, दयाशंकर सिंह, बीरसम्शेर कुर्मी, राजन श्रीवास्तव, मीना क्षेत्री सहित विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्वास्थ्यकर्मी, चिकित्सक तथा अन्य सरोकारवालों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने हैजा सहित जलजनित एवं संक्रामक रोगों के खतरे के अभी भी बने रहने की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए समय पर तैयारी, जनचेतना वृद्धि, सुरक्षित पेयजल की सुनिश्चितता तथा स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता अभिवृद्धि की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने महामारी नियंत्रण के लिए सरकारी निकायों, स्वास्थ्य संस्थानों, रेड क्रॉस तथा समुदाय के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही, हैजा नियंत्रण के दौरान प्राप्त अनुभवों, चुनौतियों एवं सफल प्रयासों की समीक्षा करते हुए भविष्य के लिए प्रभावकारी रणनीति तैयार करने में इस कार्यशाला को उपयोगी बताया।

दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में हैजा नियंत्रण एवं प्रबंधन, आपातकालीन स्वास्थ्य तैयारी, सामुदायिक जनचेतना, पेयजल एवं सरसफाई प्रबंधन, बहुपक्षीय समन्वय तथा महामारी प्रतिक्रिया से जुड़े विषयों पर प्रस्तुति, चर्चा एवं अनुभव साझा किए जाएंगे।

आयोजकों के अनुसार कार्यशाला से प्राप्त सुझाव एवं निष्कर्ष भविष्य में संभावित हैजा प्रकोप के प्रभावी प्रबंधन तथा जनस्वास्थ्य सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।