गुणवान होना ही इंसान को स्वयं में मजबूत बनाता है

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रक्सौल पूर्वी चंपारण -इंसान श्रद्धामय है और जैसी जिसकी श्रद्धा है वैसा ही उसका स्वरूप है,असल में श्रद्धा के अनुसार मनुष्य के विचार होते हैं और विचारों के अनुसार ही उसका स्वरूप भी होता है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता लायन बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। मनुष्य के विचार उसके इतने अधिक समीप हैं,जितने समीप उसके हाथ-पैर और आँख-कान आदि अंग भी नहीं हैं।जीवन उन लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जो इसका आनंद ले रहे हैं,उन लोगों के लिए मुश्किल है जो इसका विश्लेषण कर रहे हैं और उन लोगों के लिए सबसे खराब जो इसकी आलोचना कर रहे हैं।हमारा दृष्टिकोण ही हमारे जीवन को परिभाषित करता है।स्वयं को सफलता के उच्च शिखर पर देखना चाहते हैं तो दूसरों की बातों पर ध्यान देना छोड़ दें।गुणवत्ता गुणवत्ता को आकर्षित करती है, सदैव स्मरण रखें।मन के विचारों का आत्मा के साथ साक्षात् संबंध है जबकि कर-चरणादि तथा नेत्र-श्रोतादि तो मन के सेवक मात्र हैं।बेहतर पाने के लिए बेहतर बनें।समय तो अपनी गति से चलता है,एक मनुष्य ही ऐसा है जो समय से तेज भागता है या समय से काफी पीछे चलता है।जीवन उसी का मस्त है,जो स्वयं के कार्यों में व्यस्त है,परेशान वही है जो दूसरों की खुशियों से त्रस्त है।आपके अच्छे विचार आपके परम मित्र हैं और बुरे विचार आपके परम शत्रु!

विषाद, क्रोध और प्रतिशोध के विचार आपके मन में निराशा,मूर्खता और पैशाचिकता के विचारों को बुलाएंगे,उनसे आपका जीवन और भी विषादमय और अंधकारपूर्ण हो जाएगा।