अरेराज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और दैनिक वेतनभोगी कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर दो दिवसीय कार्य बहिष्कार और धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। यह आंदोलन से संबद्ध महाविद्यालयों के कर्मचारियों के प्रक्षेत्रीय संघ के आह्वान पर किया जा रहा है।
मंगलवार से शुरू हुआ यह कार्य बहिष्कार 24 मार्च से 25 मार्च 2026 तक जारी रहेगा। आंदोलनरत कर्मचारियों ने कॉलेज परिसर में ही धरना देकर विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन बार-बार पत्राचार और आग्रह के बावजूद अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
धरना दे रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षकेत्तर और दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में गहरी असंतोष की स्थिति बन गई है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
धरना में शामिल कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सेवा का नियमितीकरण, लंबित पदोन्नति की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मासिक वेतन पर लगी रोक को तत्काल हटाना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि इन मांगों को लेकर कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अब तक समाधान की दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। 📄
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक पहल करेगा।
धरना कार्यक्रम में नवीन कुमार भार्गव, शिवानंद महतो, संजय मलिक, सुधीर कुमार, शिवम कुमार, मुन्ना आलम, राजा बाबू और शुभम कुमार सहित कई कर्मचारी सक्रिय रूप से मौजूद रहे। सभी कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
फिलहाल कर्मचारियों के इस कार्य बहिष्कार से कॉलेज के प्रशासनिक कार्यों पर आंशिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अब सबकी निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जिससे इस आंदोलन के भविष्य की दिशा तय होगी। अरेराज संवादाता उज्जवल मिश्रा की खास रिपोर्ट










