एमएस कॉलेज के लॉ के छात्रों ने महारानी जानकी कुंवर गर्ल्स स्कूल में चलाया जागरूकता अभियान, बच्चों से दोस्ताना व्यवहार रखने की अभिभावकों से की अपील

22

मोतिहारी, पूर्वी चंपारण। बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और यौन अपराधों से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मोतिहारी स्थित महारानी जानकी कुंवर गर्ल्स स्कूल में पॉक्सो एक्ट को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मोतिहारी एमएस कॉलेज के लॉ के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बीच का अंतर समझाया। साथ ही उन्हें किसी भी अनुचित व्यवहार के प्रति सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए प्रेरित किया गया।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम के दौरान लॉ के छात्रों ने सरल और प्रभावशाली तरीके से छात्राओं को बताया कि उनके शरीर की सुरक्षा और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान बेहद जरूरी है। उन्होंने समझाया कि यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से छूने का प्रयास करता है या ऐसा व्यवहार करता है जिससे बच्चा असहज महसूस करे, तो उसे चुप रहने की जरूरत नहीं है।

छात्राओं को बताया गया कि ऐसी किसी भी घटना की जानकारी अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को तुरंत देनी चाहिए। बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी अनुचित व्यवहार के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं और अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाना उनका अधिकार है।

आपात स्थिति में डायल 112 से लें मदद

जागरूकता कार्यक्रम में छात्राओं को पुलिस की आपातकालीन सहायता सेवा डायल 112 के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किसी आपात स्थिति या खतरे की आशंका होने पर पुलिस से सहायता मांगी जा सकती है।

इसके साथ ही साइबर अपराधों के प्रति भी जागरूक किया गया। छात्राओं को बताया गया कि यदि उनके साथ ऑनलाइन ठगी या साइबर फ्रॉड होता है, तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर की जा सकती है। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है। छात्राओं को ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतने और अपनी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह भी दी गई।

अभिभावकों से बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने की अपील

कार्यक्रम में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अभिभावकों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। लॉ के छात्रों ने अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया कि बच्चों के साथ डर और सख्ती के बजाय दोस्ताना व्यवहार रखें, ताकि वे अपने मन की बात खुलकर बता सकें।

उन्होंने कहा कि माता-पिता को रोजाना बच्चों से स्कूल में हुई घटनाओं, दोस्तों के व्यवहार और दिनभर के अनुभवों के बारे में प्यार से पूछना चाहिए। ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जिसमें बच्चे बिना किसी डर या झिझक के अपनी परेशानी साझा कर सकें।

यदि बच्चा किसी घटना या अनुचित व्यवहार के बारे में जानकारी देता है, तो उसकी बात को गंभीरता से सुनना और उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है। बच्चों को डांटने या डराने के बजाय उनका विश्वास जीतना चाहिए।

जागरूकता ही बच्चों की सुरक्षा की मजबूत नींव

इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और कानूनी सहायता के प्रति सजग बनाना था। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को गलत और सही व्यवहार की पहचान करने, अपनी समस्याओं को साझा करने तथा समय पर सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि उन्हें सही जानकारी दी जाए और उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाए।