आंतरिक सहानुभूति व कोमलता संवेदना,दया,प्रेम एवं करुणा का सम्मिश्रण है

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ईश्वर की सबसे अद्भुत उत्कृष्ट रचना – मनुष्य एक ऐसा प्राणी है,जो बगैर दया,प्रेम या करुणा के जीवन को ज्यादा समय तक नहीं चला सकता,फिर सहानुभूति तो इन सबका सम्मिश्रण है,उसके अभाव में तो निश्चित कुछ खोया – सा लगेगा। उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।सहानुभूति मनुष्य की आंतरिक शक्तियों में से एक है।सहानुभूति मनुष्य के हृदय में निवास करने वाली वह कोमलता है,जिसका निर्माण संवेदना,दया,प्रेम और करुणा के सम्मिश्रण से होता है।वह आत्मा की निस्वार्थ भाषा है,जिसकी वाणी मूक है,किन्तु हर हृदयवान,विवेकवान उसे समझ लेता है।जीवन में मानसिक,शारीरिक या अन्य उथल-पुथल पैदा होने का कारण यही है कि हम उपर्युक्त शक्तियों को सत्यतापूर्वक न अपनाकर,उनका निरादर ही करते हैं।प्रेम,दया एवं करुणा ऐसे मानवीय गुण हैं कि उनके अभाव में एक पल चलना भी भारी हो जाता है,किंतु आज का विचारवान मनुष्य इन पर गहन रूप से ध्यान नहीं देता है।प्रेम के अभाव में जीवन नीरस व वीरान हो सकता है साथ ही करुणा,दया,सहयोग के अभाव में समाज या परिवार का संतुलन भी अव्यवस्थित हो सकता है।कितना सुंदर हो यदि मनुष्य जीवन के उन सत्यों को मान ले और उसकी यथार्थता को स्वीकार कर आत्मसात् करते हुए चले,जिनके अभाव में न केवल जीवनक्रम समाप्त हो सकता है,बल्कि समाज का ढाँचा भी बदल सकता है।