मोतिहारी। पूर्वी चंपारण मुख्यालय मोतिहारी में बिहार राज्य किसान सभा का 38वां राज्य सम्मेलन शनिवार को विजयकांत ठाकुर नगर स्थित वाईएस विवाह भवन में आयोजित खुले अधिवेशन के साथ शुरू हुआ। सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों से आए लगभग 400 किसान प्रतिनिधियों तथा हजारों किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसान नेताओं ने किसानों, भूमिहीनों और कृषि संकट से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड अशोक ढवले ने कहा कि आज किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल जमीन का है। उन्होंने कहा कि “जो जमीन जोतेगा, वही उसका मालिक होगा” की अवधारणा को लागू करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में लगभग 22 लाख भूमिहीन किसानों को जमीन देने का वादा किया गया था, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हो सका। उन्होंने किसानों से भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
अशोक ढवले ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और खाद की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से किसानों की लागत बढ़ी है, जिससे खेती करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों का प्रतिकूल प्रभाव देश के किसानों पर पड़ रहा है।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं सांसद अमराराम ने कहा कि देश के किसान गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बीते वर्षों में लाखों किसानों ने आर्थिक परेशानियों के कारण आत्महत्या की है, लेकिन किसानों को कर्जमुक्त करने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि किसानों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा।
अमराराम ने कहा कि किसान आंदोलन की ताकत के कारण ही केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल पर अत्यधिक कर लगाकर आम जनता और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। साथ ही उन्होंने बिजली क्षेत्र के निजीकरण का भी विरोध करते हुए कहा कि इससे आम उपभोक्ताओं और किसानों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने मनरेगा, सूचना का अधिकार, कृषि लागत, सिंचाई व्यवस्था, न्यूनतम समर्थन मूल्य, भूमिहीन किसानों के अधिकार तथा ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। नेताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों की एकता से ही उनके अधिकारों की रक्षा संभव है।
कार्यक्रम को अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बादल सरोज, संयुक्त सचिव अवधेश कुमार, बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव विनोद कुमार, उपाध्यक्ष ललन चौधरी, विधायक अजय कुमार, रामजतन सिंह, प्रभुराज नारायण राव, श्याम भारती, संजय कुमार, रणधीर यादव, एम. सत्तार अंसारी, अशोक पाठक तथा सत्येंद्र मिश्र सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
सम्मेलन की अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद सिंह ने की, जबकि संचालन धनंजय गिरि ने किया। कार्यक्रम में किसानों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई और आगामी दिनों में किसान हितों के मुद्दों पर व्यापक आंदोलन चलाने का संकल्प लिया गया।
बिहार राज्य किसान सभा के इस राज्य सम्मेलन ने मोतिहारी में किसानों की समस्याओं, कृषि संकट और भूमि अधिकारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस को जन्म दिया है। सम्मेलन में मौजूद किसानों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों और मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।










