केंद्र सरकार द्वारा वरिष्ठ कलाकारों को दी जाने वाली पेंशन योजना के तहत तय की गई वार्षिक आय सीमा को लेकर रंगकर्मियों और कलाकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सरकार द्वारा इस योजना के लिए पति-पत्नी दोनों को मिलाकर अधिकतम वार्षिक आय सीमा मात्र 72 हज़ार रुपए तय की गई है, जिसे स्थानीय कलाकारों ने एक बड़ा मज़ाक करार दिया है। कलाकारों का कहना है कि यह निर्णय व्यावहारिक परिस्थितियों से कोसों दूर है और इससे ज़रूरतमंद कलाकारों को सहायता मिलने के बजाय वे इस योजना से वंचित हो जाएंगे।
स्थानीय रंगकर्मियों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे कला और संस्कृति मंत्री तथा संबंधित सचिवों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। कलाकारों का कहना है कि आज की अभूतपूर्व महंगाई के दौर में, चाहे कोई व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र में ही क्यों न रह रहा हो, मात्र 72 हज़ार रुपए प्रति वर्ष की आय में पूरे परिवार का सम्मानजनक जीवन यापन करना पूरी तरह असंभव है। यह राशि भारत सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम श्रमिक मज़दूरी की रकम से भी बेहद कम है, जिससे इस योजना की प्रासंगिकता पर ही गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
इस विसंगति को उजागर करते हुए कलाकारों ने बिहार सरकार की मौजूदा व्यवस्था का उदाहरण दिया है। वरीय रंगकर्मियों को बिहार सरकार द्वारा भी पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिसमें ज़मीनी हकीकत को समझते हुए अधिकतम वार्षिक आय सीमा 1 लाख 20 हज़ार रुपए रखी गई है। कलाकारों ने केंद्र सरकार से पुरज़ोर मांग की है कि वह अपनी पेंशन योजना की पात्रता शर्तों पर तत्काल पुनर्विचार करे और अधिकतम वार्षिक आय सीमा को 72 हज़ार रुपए के स्थान पर बढ़ाकर कम से कम 1 लाख 20 हज़ार रुपए करे, ताकि देश के अधिक से अधिक वरिष्ठ कलाकारों को इस योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।










