सुप्रीम कोर्ट नेपाल का बड़ा फैसला : सीमावर्ती नागरिकों को राहत, आवश्यक सामान ले जाने की मिली अनुमति

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रामगढ़वा / रक्सौल –

सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों ने किया स्वागत, कहा — भारत-नेपाल संबंध होंगे और मजबूत

रक्सौल/बीरगंज। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भारत-नेपाल सीमा से लाए जाने वाले दैनिक उपभोग एवं पारिवारिक उपयोग के सामान पर 100 रुपये से अधिक की खरीददारी पर तत्काल कस्टम शुल्क लागू नहीं करने का अंतरिम आदेश देकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों लोगों को बड़ी राहत दी है। अदालत के इस फैसले के बाद रक्सौल-बीरगंज समेत विभिन्न चेकपोस्टों पर आम नागरिकों को राशन, दवाइयां, फल-सब्जियां एवं घरेलू जरूरत के सामान ले जाने की अनुमति मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नेपाल पुलिस एवं सीमा सुरक्षा इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि केवल बड़े पैमाने पर होने वाले व्यापारिक माल अथवा अवैध वस्तुओं की जांच की जाए तथा आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

*दो महीने से परेशान थे सीमावर्ती लोग*

मधेश, तराई एवं सीमा क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक दो महीने से सख्त जांच, सामान जब्त किए जाने तथा चेकपोस्टों पर अनावश्यक रोक-टोक की समस्या से जूझ रहे थे। विशेषकर बीरगंज और रक्सौल जैसे सीमावर्ती शहरों में प्रतिदिन आने-जाने वाले हजारों परिवारों के लिए यह परेशानी का कारण बन गया था। अदालत के इस फैसले से अब आम लोगों को राहत मिलने के साथ-साथ सीमा क्षेत्र में सामान्य जनजीवन के सुचारु होने की उम्मीद बढ़ गई है।

सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों ने जताई खुशी

नेपाल सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का विभिन्न सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है।

भारत विकास परिषद, शाखा रक्सौल के अध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी, लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष बिमल सर्राफ, रक्सौल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव, महासचिव शंभु प्रसाद चौरसिया, टेक्सटाइल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता तथा इंडो-नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी एवं अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध एवं तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में पड़ोसी देशों को एक-दूसरे के साथ सहयोग एवं विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।

बेटी-रोटी के संबंध को करेगा और मजबूत

व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि नेपाल सरकार द्वारा हाल के महीनों में सीमाओं पर सख्ती बढ़ाए जाने से सीमावर्ती शहरों का व्यापार प्रभावित हुआ था। लोगों की आवाजाही कम हो गई थी और बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा था।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराने “बेटी-रोटी” के संबंध को और अधिक प्रगाढ़ करेगा तथा दोनों देशों के ऐतिहासिक खुले सीमा संबंधों की भावना को मजबूती प्रदान करेगा।

व्यापार एवं जनजीवन को मिलेगा बढ़ावा

संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस फैसले से स्थानीय व्यापारियों एवं आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लोगों को चेकपोस्टों पर घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास भी मजबूत होगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य में इस अंतरिम आदेश को स्थायी रूप से लागू करने की दिशा में भी नेपाल सरकार को आवश्यक निर्देश देगा, ताकि सीमावर्ती शहरों का व्यापार एवं जनजीवन फिर से पूरी तरह गुलजार हो सके।

पहले जताई गई थी गहरी चिंता

गौरतलब है कि 100 रुपये से अधिक की खरीददारी पर भन्सार (कस्टम शुल्क) लगाए जाने के नेपाल सरकार के निर्णय पर सीमावर्ती सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों ने पूर्व में गहरी चिंता व्यक्त की थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश से मधेश, तराई एवं सीमा क्षेत्रों के नागरिकों में राहत एवं उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। इसकी जानकारी लायंस क्लब रक्सौल के अध्यक्ष एवं सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी भारत विकास परिषद शाखा- रक्सौल के बिमल सर्राफ ने दी है।