जय परशुराम के जयघोष के साथ मनाई गई भगवान परशुराम जयंती, सामाजिक एकता और अधिकार जागरूकता पर दिया गया जोर

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भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर राष्ट्रीय ब्राह्मण संघ द्वारा NH बायपास स्थित सतवींंन विवाह भवन के हाल में भगवान परशुराम जयंती का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत “जय परशुराम! जय जय परशुराम!!” के उद्घोष के साथ हुई, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के अनेक प्रबुद्ध जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर भगवान परशुराम की प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की गई। उपस्थित लोगों ने श्रद्धा और आस्था के साथ भगवान परशुराम को नमन करते हुए समाज में धर्म, न्याय और सत्य की स्थापना के संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मण समाज से जुड़े सामाजिक एवं आर्थिक विषयों पर एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें समाज की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई।

सभा को संबोधित करते हुए समाज के प्रबुद्ध वक्ताओं—श्री चन्द्रकिशोर मिश्रा, जितेन्द्र तिवारी, नरेश पांडेय, सुशील पाठक, अनिकेत पांडेय, रजत पाठक, पुष्कर झा, राहुल आर पांडेय, अमित पाठक, पंकज द्विवेदी, समाजसेवी मिनी द्विवेदी, गायिका सलोनी कुमारी, अखिलेश मिश्रा, अभिनव पाण्डेय, राजू चौबे एवं रोचक झा—ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। सभी वक्ताओं ने समाज की एकजुटता और जागरूकता को समय की आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अखिलेश कुमार मिश्रा ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ शिक्षक श्री संजय तिवारी ने किया। दोनों ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

राष्ट्रीय ब्राह्मण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम एक महायोद्धा थे, जिन्होंने अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष का बीड़ा उठाया था। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे भगवान परशुराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज को संगठित तथा सशक्त बनाने में योगदान दें।

संघ के सचिव श्री चंद्रमोहन मिश्रा ने कहा कि भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। उनके हाथ में धारण किया गया फरसा केवल एक हथियार नहीं, बल्कि धर्म रक्षा और न्याय के संकल्प का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज में अधर्म और अन्याय बढ़ा, तब-तब भगवान परशुराम ने उसका विरोध किया और न्याय की स्थापना की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि युवातुर्क मुकेश पाठक ने कहा कि भगवान परशुराम का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी समाज में भ्रष्टाचार, अन्याय और शोषण जैसी समस्याएं मौजूद हैं, जिनके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परशुराम जयंती केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और संगठित करने का संदेश भी देता है।

संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता अमित पाठक ने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना और धर्म के मार्ग पर चलना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। कार्यक्रम के अंत में समाज की एकता, शिक्षा और जागरूकता को बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।