अरेराज धाम में सत्तूआनी बना सामाजिक समरसता का महापर्व, भक्ति-सेवा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम

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अरेराज: अनादि काल से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे बाबा सोमेश्वरनाथ महादेव की पावन नगरी अरेराज धाम में आज सत्तूआनी का पर्व केवल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सेवा भावना और सनातन संस्कृति के जीवंत संदेश का एक विराट उत्सव बनकर उभरा। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के आह्वान पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर कर दिया।

प्रातः काल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार और ऋचाओं के मधुर स्वर के बीच बाबा सोमेश्वरनाथ महादेव का विधिवत अभिषेक किया गया। इसके पश्चात परंपरा के अनुसार सत्तू एवं शीतल जल का भोग अर्पित कर लोक कल्याण, समाज की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई। इस दौरान पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा, जिससे अरेराज धाम की पवित्रता और श्रद्धा का स्वरूप और भी दिव्य हो गया।

इस अवसर पर अरेराज पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रविशंकर गिरि जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की भव्यता को और भी बढ़ा दिया। उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर समाज के वंचित और निर्धन वर्गों के बीच अन्न एवं दक्षिणा का वितरण किया। उनके इस सेवा कार्य ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सनातन परंपरा में सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहयोग पहुंचाना ही सच्ची साधना है।

अपने संबोधन में महामंडलेश्वर जी ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष  रणबीर नंदन की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके कुशल मार्गदर्शन में बिहार के मठ-मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरण और समरसता के सशक्त स्तंभ बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जिस प्रकार समाज को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, वह निश्चित रूप से सनातन धर्म की जड़ों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

महामंडलेश्वर जी ने आगे कहा कि जब संत, महंत और समाज का नेतृत्व एक सूत्र में बंधकर धर्म की रक्षा और समाज के उत्थान का संकल्प लेते हैं, तभी राष्ट्र सशक्त और गौरवशाली बनता है। उन्होंने श्री रणबीर नंदन को यशस्वी एवं दीर्घायु होने का आशीर्वाद देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत एक नए स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर होगी।

सत्तूआनी के इस पावन अवसर पर पूरे अरेराज क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर इस आयोजन में भाग लिया और इसे सामाजिक एकजुटता तथा पारंपरिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना था कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस प्रकार अरेराज धाम में मनाया गया सत्तूआनी पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा भावना और सांस्कृतिक चेतना का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत कर गया।