अरेराज में आध्यात्मिक ऊर्जा का महासंगम — हरिहरनाथ से मुक्तिनाथ जा रही भव्य यात्रा का ऐतिहासिक स्वागत, गूंजे जयकारे और उमड़ा जनसैलाब

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अरेराज सोमेश्वरनाथ की पावन नगरी अरेराज उस समय भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के विराट वातावरण में डूब गई, जब हरिहरनाथ से मुक्तिनाथ की ओर प्रस्थान कर रही विशाल आध्यात्मिक यात्रा ने नगर में प्रवेश किया। यात्रा के नगर की सीमा में पहुँचते ही श्रद्धालुओं, संतों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने फूल-मालाओं, जयघोष और पारंपरिक स्वागत के साथ इस दिव्य कारवां का भव्य अभिनंदन किया। पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” और “भारत माता की जय” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

इस विशेष अवसर पर महामंडलेश्वर रविशंकर गिरी जी महाराज ने कहा कि आज का दिन अरेराज नगर के लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का एक पवित्र अभियान है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सदैव विश्व को दिशा देने का कार्य करती रही है और इस प्रकार की यात्राएं उसी महान परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनती हैं।

महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि हरिहरनाथ से मुक्तिनाथ तक की यह यात्रा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। यह यात्रा समाज के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब समाज आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है, तभी राष्ट्र भी सशक्त बनता है।

यात्रा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ा दिया। इसके साथ ही संत रविदास जी और अरुण जी की सहभागिता ने इस आयोजन को और अधिक प्रेरणादायी बना दिया। सभी अतिथियों ने यात्रा के उद्देश्य की सराहना करते हुए इसे समाज को जोड़ने वाला ऐतिहासिक प्रयास बताया।

स्वागत समारोह में बाबा सोमेश्वरनाथ मंदिर के पंडा-पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संतों और श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। संघ के स्वयंसेवकों ने अनुशासन और सेवा भावना का परिचय देते हुए पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नगरवासियों ने भी पूरे उत्साह के साथ इस आध्यात्मिक आयोजन में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

नगर के विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय युवाओं ने जगह-जगह स्वागत द्वार बनाकर यात्रा का अभिनंदन किया। महिलाओं और बच्चों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। पूरे नगर में श्रद्धा, आस्था और एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने अरेराज की धार्मिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ बना दिया।

सामूहिक वंदना, पूजन और स्वागत कार्यक्रम के उपरांत यह विशाल आध्यात्मिक कारवां अपने अगले गंतव्य की ओर आगे बढ़ गया। विदाई के समय भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह यात्रा अपने पीछे अरेराज की पावन धरती पर आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव की अमिट छाप छोड़ गई।