मोतिहारी के जमला में स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट का हाल वाकई चिंताजनक है। इसे शहर के कचरा निस्तारण और पर्यावरण सुधार के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में यह योजना अपनी उद्देश्यपूर्ति से कोसों दूर है।
समस्याओं की मुख्य वजहें:
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तकनीकी त्रुटियां और संचालन की अनियमितता: प्लांट के उपकरण और इंजन चालू होते ही बंद होने लगते हैं, जिससे संचालन बाधित रहता है।
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जमीन की कमी :कचरा डंप करने और प्रसंस्करण के लिए रूलही में 15 एकड़ जमीन की जरूरत है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हुआ।
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विभागीय उदासीनता: यह पूरी परियोजना कागजों तक सिमट कर रह गई है, और समय पर फैसले नहीं लिए जा रहे हैं।
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नया टेंडर लंबित: पुराना टेंडर खत्म हो चुका है, और नए टेंडर का निर्देश अब तक विभाग से नहीं आया है।

संभावित परिणाम:
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शहर का प्रदूषण कम होने के बजाय और बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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जैविक खाद और फर्निश ऑयल बनाने की योजना ठप है, जिससे किसानों और निगम की आमदनी पर असर पड़ा है।
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प्लांट परिसर में कचरे के ढेर से दुर्गंध और गंदगी फैल रही है।
समाधान के सुझाव:
- त्वरित टेंडर प्रक्रिया: नए टेंडर को प्राथमिकता देते हुए संचालन के लिए जिम्मेदार एजेंसी नियुक्त की जाए।
- जमीन का अधिग्रहण: रूलही में 15 एकड़ जमीन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए।
- स्थानीय संसाधनों का उपयोग: अस्थायी तौर पर स्थानीय संसाधनों और विशेषज्ञों की मदद से प्लांट को चालू रखने की योजना बनाई जाए।
- समीक्षा और जवाबदेही: विभागीय स्तर पर इस परियोजना की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए।
- शहरवासियों को जागरूक करना: कचरा अलग-अलग करने और पुनर्चक्रण के लिए नागरिकों को जागरूक किया जाए।











