भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने के लिए समाज का हर वर्ग आगे आए

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रिपब्लिक 7 भारत मोतिहारी: भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन भी करना होगा। सभी वर्ग को जागरूक करना भी जरूरी है।

शनिवार  गाँधी संगा्लय  में आयोजित एक कार्यकर्म में विनय कुमार सिंह आईपी एस ( सेवा निवृत), पूर्व महानिदेशक जेल, तेलंगाना एवं पूर्व डी आई जी एस टी एफ, बिहार है जिन्होने कहा कि ईमानदारी, कर्त्तव्यनिष्ठा तथा सत्य एवं न्याय के लिए सघर्ष सर्वविदित है। इनमें अन्य नेताओं एवं अधिकारियों की तरह पद, पदवी अथवा राजनीतिक सत्ता की ललसा नहीं अपितु स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी एवं जय प्रकाश नारायण की तरह बिना राजनीतिक सत्ता के समाज को बेहतर बनाने, असली प्रजातंत्र को बहाल करने एवं लोगों के जीवन को सुखमय बनाने का संकल्प लिया बिहार में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है,

सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करती है। भ्रष्टाचार को कम करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें कानूनों और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना शामिल है।

बिहार आज देश के 28 राज्यों में लगभग हर क्षेत्र में सबसे पिछड़ा हुआ प्रदेश है। बिहार में उद्योग, व्यापार
कल करखानें, कृषि एवं रोजगार का बुरा हाल है । यह राज्य मजदुरों का कारखाना बन गया है । बेकारी,
बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, आपसी वैमनस्य, भ्रष्टाचार एवं बेहतर कानून व्यवस्था का पर्यायवाची शब्द है
बिहार पर इस स्थिति के जिम्मेवार सरकार, राजनीतिक दल एवं राजनेता नहीं बल्कि जनता स्वयं है

क्योंकि सभी लोगों को पता है कि हम सरकार किस अधार पर चुनते हैं । कौन कहता है कि बिहार में
जातीवाद है ? अगर बिहार में जातीवाद रहता तो हर एक जाती के नेता अपनी अपनी जातियों का विकास कर लेते
और बिहार में महापरिवर्तजन संगठन की जरूरत नहीं पड़ती। सच्चाई यह है कि बिहार में हर जाती में दस-बीस
राज परिवार हैं जो अपने परिवार और निजि स्वार्थ के लिए अपनी अपनी जातियों का भावनाओं का उभार कर
उनका भरपूर शोषण कर रहे हैं। बिहार के लोग अपनी अपनी जाती राज परिवारों के बंधुआ मजदूर है जो पीढ़ी
दर पीढ़ी उन राज परिवारों के अयोग्य और अनपढ़ बेटे, पोते एवं परपोते की चाकरी के लिए जन्म लेते है
इन लोगों ने अपने रातनीतिक एवं आर्थिक स्वार्थ के लिए सम्राट अशोक एवं चाणक्य की भूमि को खंडहर बना दिया | समाज को, गाँव को, टोले को इन राजपरिवारों ने जातीय विष भर-भर कर खंडित कर दिया ।जब बिहार के लोगों ने बिहार को बर्बाद किया है तो इसको सुधारने की जिम्मेवारी भी बिहार के लोगों को लेनी पड़गी।
इस दयनीय स्थिति से उबरने के लिए महापरिवर्तन संगठन के प्रणेता गाँव में घूम घूम कर पाँच सूत्रीय मार्ग बता रहे है।

1. गाँव के हर विवाद, केस मुकदमे इत्यादि का समाधान गाँव में ही परस्पर बातचीत से करना ताकी थाने कोर्ट
कचहरी में अपनी गाढ़ी कमाई एवं समय की बर्बादी न हो 

2. संपूर्ण शिक्षा एवं विद्यालयों के स्तर में सुधार क्योंकि गरीबों के आगे बढ़ने का शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है।

3. स्वच्छ गाँव, स्वच्छ शहर । गाँव-गाँव शहर शहर में स्वच्छता अभियान चलाया ।

4. सामूहिक स्प से भ्रष्टाचार का विरोध । भ्रष्टाचार से हम अकेले नहीं लड़ सकते और भ्रष्टाचार रूके बिना।विकास भी नहीं हो सकता।

5. चुनाव में किसी भी जाति के किसी भी दल के अच्छे उम्मीदवार को उसके गुण-कर्म के अधार पर मत देना ।

मुखिया से लेकर सांसद तक का चुनाव अब नेता एवं पार्टी नहीं बल्कि जनता आपस में मंत्रणा करके करेगी।
चुनाव के दिन हमारी दो मिनट की समक्षदारी अपने परिवार और अपने राज्य के भविष्य को बदल देगी।
इन पाँच उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हम हर प्रखण्ड में हर ग्राम पंचायत से एक प्रतिनिधि लेकर प्रखण्ड
समिति, हर ग्राम पंचायत में उस पंचायत के हर गाँव से एक प्रतिनिधि लेकर पंचायत समिति एवं हर गाँव में
सभी लोग सर्वसम्मिति से एक आम सभा आयोजित कर जाति, वर्ग, पुरुष एवं महिला, धनी एवं गरीब इत्यादी के
भेदभाव के बिना 15 लोगों की ग्राम समिति बनाएंगे।

ग्राम समितियां गाँव के राजनीतिक उत्थान, अर्थिक विकास एवं समाजिक बुराइयों पर लगाम कर कर सरकारी योजनाओं के सही कार्यान्वयन के लिए काम करेगी। ये सभी समितियाँ महीने में एक बार बैठक करेगी। चौरासी लाख योनी के बाद मिले मानव जीवन को हम मजदूर बनकर नहीं बर्बाद कर सकते। हम बिहारी
मजदूर है चूँकि हमारी सोंच मजदूरों की है। हमारे प्रणेता बिहार की इस सोच को बदलना चाहते है।

हमारा विश्वास है, कि भारत महाशक्ति तब तक नहीं बन सकता जब तक बिहार नहीं जगेगा। हमारी रंगो में
विश्व विजेता एवं विश्व गुरू का खून है। आइए, हम अपनी कायरता और आलस को त्याग कर दूसरे जनसंगठन
द्वारा बिहार एवं अपने परिवार के भविष्य को बचाएँ ।