पानी से जलने वाले दीपक ने बढ़ाया दीपोत्सव का आकर्षण, प्रदूषण मुक्त रोशनी का दिया संदेश

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मोतिहारी। दीपोत्सव के शुभ अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्त रोशनी का संदेश देने के उद्देश्य से भारत निर्मित स्वास्तिक दीये का अनोखा प्रदर्शन किया गया। डॉ. शम्भू नाथ सीकरीया द्वारा पानी से जलने वाले इन विशेष दीपकों का प्रदर्शन किया गया और लोगों के बीच इसका वितरण भी किया गया। दीपक को देखकर लोग उत्साहित नजर आए और इसके बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर डॉ. शम्भू नाथ सीकरीया ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दीपक और प्रकाश का विशेष महत्व है। दीपावली सहित विभिन्न पर्वों पर दीप जलाकर प्रकाश और सकारात्मकता का संदेश दिया जाता है। ऐसे में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना रोशनी का विकल्प तैयार करना समय की आवश्यकता है।

प्रदूषण मुक्त रोशनी का संदेश

कार्यक्रम के दौरान ऐसे पटाखों का भी वितरण किया गया, जिनके संबंध में आयोजकों ने बताया कि उनसे मुख्य रूप से रोशनी होती है और प्रदूषण कम करने का प्रयास किया गया है। लोगों को दीपोत्सव के दौरान पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने और सुरक्षित तरीके से पर्व मनाने का संदेश दिया गया।

डॉ. सीकरीया ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रदूषण मुक्त भारत के संकल्प की दिशा में छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। इसी सोच के तहत भारत में निर्मित पानी से जलने वाले दीपकों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कुम्हारों के लिए रोजगार की नई उम्मीद

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कुम्हार समुदाय के लोग भी इस तरह के दीपकों का निर्माण कर सकेंगे। इससे पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उनके लिए रोजगार की नई संभावनाएं पैदा करने की उम्मीद जताई गई। उनका कहना था कि यदि ऐसे दीपकों का निर्माण स्थानीय स्तर पर होने लगे तो कुम्हार परिवार पारंपरिक मिट्टी के दीपकों के साथ आधुनिक विकल्प भी तैयार कर सकेंगे।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि दीपोत्सव को भारतीय संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाया जाए। मिट्टी के दीयों के उपयोग के साथ प्रदूषण को कम करने वाले विकल्पों को भी बढ़ावा दिया जाए।

इस दौरान डॉ. शम्भू नाथ सीकरीया ने सभी लोगों को दीपोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रकाश का यह पर्व हर व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।

उन्होंने अपने संबोधन में वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, वर्ष 2029 में भारत और वर्ष 2034 में विश्व स्तर पर सनातन संस्कृति के प्रभाव से जुड़े अपने संकल्प और कामना का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम का समापन सभी लोगों को दीपोत्सव की शुभकामनाओं और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के संदेश के साथ हुआ।