रक्सौल–बीरगंज में महंगाई का ‘अलार्म’—उपभोक्ता मंच का बड़ा आरोप, कालाबाजारी और लूटतंत्र पर लगाम लगाने की मांग

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रक्सौल/बीरगंज से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां नेपाल के पर्सा जिले में बढ़ती महंगाई को लेकर अब आवाज तेज हो गई है। उपभोक्ता हित संरक्षण मंच नेपाल, पर्सा ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ दैनिक जरूरत की वस्तुओं और सेवाओं में हो रही बेतहाशा मूल्यवृद्धि पर गंभीर चिंता जताई है।

सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच ने साफ कहा कि हाल के दिनों में खाद्यान्न, ईंधन, यातायात और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस अनियंत्रित महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। खासकर कम आय वर्ग और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिनके लिए अब घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

मंच ने बाजार व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि प्रभावी बाजार अनुगमन नहीं होने के कारण कालाबाजारी, कृत्रिम अभाव और मनमानी कीमत वसूली जैसी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इससे बाजार का संतुलन बिगड़ता जा रहा है और उपभोक्ता सीधे तौर पर शोषण का शिकार हो रहे हैं।

प्रेस विज्ञप्ति के जरिए मंच ने पांच सूत्रीय मांगपत्र भी जारी किया है। इसमें प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है कि बाजार को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही सड़क विस्तार के दौरान बिना पर्याप्त समय दिए घर और दुकानों को तोड़े जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। मंच का कहना है कि कम से कम 6 से 7 दिन का समय दिए बिना ऐसी कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है।

सीमा नाका पर सख्ती और बाजार में कृत्रिम अभाव को रोकने की भी मांग की गई है। मंच ने आरोप लगाया कि नियामक निकाय और प्रशासन इस पूरे मामले में मौन साधे हुए हैं, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया गया है खसी (बकरे) के मांस की कीमत को लेकर। मंच ने कहा कि अचानक प्रति किलो 1000 नेपाली रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया, लेकिन यह फैसला किसकी सहमति से लिया गया, यह स्पष्ट नहीं है। मंच ने चेतावनी दी कि व्यवसायी संघ के नाम पर किसी भी प्रकार का लूटतंत्र बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा मुख्य सड़क से हटकर अन्य क्षेत्रों में मकान मालिकों द्वारा अत्यधिक सटर किराया और भारी पेशगी वसूलने पर भी मंच ने कड़ी आपत्ति जताई है। स्थानीय सरकार से ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

अंत में उपभोक्ता हित संरक्षण मंच ने प्रशासन को चेताया है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता की परेशानी और बढ़ेगी। मंच ने बाजार को उपभोक्ता अनुकूल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन को जवाबदेह बनने की मांग की है।

इस विज्ञप्ति पर मंच के केंद्रीय सदस्य अजित कुमार भुजेल के हस्ताक्षर हैं, जो इस पूरे मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।