दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि मन के अंधकार को मिटाकर मानवता का प्रकाश फैलाने का संदेश है

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प्रेम, सद्भाव, संस्कार और सकारात्मक सोच के दीप जलाकर जीवन को खुशियों से रोशन करें, क्योंकि सच्ची दीपावली दूसरों के जीवन में उजाला लाने से सार्थक होती है।

रक्सौल,पूर्वी चंपारण। सवादाता बिमल सर्राफ

भारत की संस्कृति और परंपरा में दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला एक महान संदेश है। यह पर्व हमें सिखाता है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक छोटी-सी किरण उसे दूर करने की शक्ति रखती है। दीपावली का प्रत्येक दीप आशा, विश्वास, प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह हमें अपने घरों के साथ-साथ अपने मन, विचारों और व्यवहार को भी प्रकाशमय बनाने की प्रेरणा देता है।

दीपावली आते ही चारों ओर उत्साह, उमंग और उल्लास का वातावरण छा जाता है। घर-आंगन की सफाई, रंग-बिरंगी रंगोलियां, दीपों की कतारें, मिठाइयों की खुशबू और अपनों के बीच खुशियां बांटने की परंपरा इस पर्व को विशेष बना देती है। लेकिन इस उत्सव का वास्तविक सौंदर्य केवल बाहरी सजावट में नहीं, बल्कि हमारे भीतर जागने वाली प्रेम और सद्भावना की भावना में छिपा है।

दीपावली भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और उनके स्वागत में दीप जलाने की पावन परंपरा से जुड़ी हुई है। यह प्रसंग हमें सत्य, मर्यादा, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, यदि हमारा विश्वास मजबूत है और कर्म सही दिशा में हैं, तो अंततः सफलता और सुख का प्रकाश अवश्य मिलता है।

आज के समय में दीपावली का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में कहीं न कहीं मनुष्य अपने आत्मिक सुख, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक जिम्मेदारियों को पीछे छोड़ता जा रहा है। ऐसे में दीपावली हमें रुककर आत्मचिंतन करने का अवसर देती है। हमें विचार करना चाहिए कि क्या हमारे जीवन में केवल घर रोशन हैं या हमारे व्यवहार से किसी दूसरे के जीवन में भी उजाला पहुंच रहा है?

सच्ची दीपावली तब होगी, जब किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान आए, किसी निराश व्यक्ति को आशा मिले, किसी अकेले व्यक्ति को अपनापन महसूस हो और किसी गरीब परिवार के घर में भी खुशियों का दीप जल सके। त्योहार की मिठास तभी बढ़ती है, जब उसमें दूसरों के प्रति संवेदना और सहयोग का भाव शामिल हो।

हमें इस पावन अवसर पर अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, कटुता और नकारात्मक विचारों को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। दूसरों की सफलता से प्रसन्न होना, रिश्तों में विश्वास बनाए रखना, बड़ों का सम्मान करना, छोटों को स्नेह देना और समाज में भाईचारे को मजबूत करना ही दीपावली की सच्ची भावना है।

इसके साथ ही हमें पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। दीपावली को स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त बनाने का प्रयास करना चाहिए। मिट्टी के दीपों को प्रोत्साहित करना, अनावश्यक शोर और धुएं से बचना तथा प्रकृति की सुंदरता को बनाए रखना भी हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है।

आइए, इस शुभ दीपावली पर हम केवल अपने घरों में ही नहीं, बल्कि अपने विचारों, संस्कारों और व्यवहार में भी दीप जलाएं। ऐसा दीप जलाएं, जो किसी के जीवन से निराशा मिटाए, ऐसा दीप जलाएं, जो रिश्तों में विश्वास बढ़ाए और ऐसा दीप जलाएं, जिसकी रोशनी समाज में प्रेम, एकता और मानवता का संदेश फैलाए।

क्योंकि दीपावली की असली चमक सोने-चांदी की सजावट में नहीं, बल्कि इंसान के उज्ज्वल विचारों और नेक कर्मों में होती है। दीप वही सार्थक है, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को रोशन करे।

इसी मंगलकामना के साथ सभी देशवासियों को प्रकाश, प्रेम, सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव के महापर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

आइए, इस दीपावली एक संकल्प लें—एक दीप अपने घर के लिए, एक दीप समाज के लिए और एक दीप मानवता के नाम जलाएं।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल , डिस्ट्रिक्ट 322ई, जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।