छात्रा पुष्पा कुमारी के सवालों में उलझे भाजपा नेता अखिलेश प्रसाद सिंह! जवाब देने के बजाय भाषण देने लगे

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मोतिहारी। भारतीय जनता पार्टी की ओर से मोतिहारी के एक निजी सभागार में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब युवाओं के साथ आयोजित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में एक कॉलेज की छात्रा के सवालों का जवाब देने में भाजपा नेता अखिलेश प्रसाद सिंह उलझते नजर आए। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के साथ संवाद स्थापित करना और लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना था, लेकिन सवाल-जवाब का यह सत्र उस समय असहज स्थिति में पहुंच गया, जब छात्रा पुष्पा कुमारी ने सीधे और स्पष्ट सवाल पूछने शुरू किए।

सवाल पूछती छात्रा (R7 भारत)
                        सवाल पूछती छात्रा (R7 भारत)

बताया गया कि प्रश्नोत्तरी के दौरान कॉलेज की छात्रा पुष्पा कुमारी ने भाजपा नेता अखिलेश प्रसाद सिंह से कुछ ऐसे सवाल किए, जिनका सीधा जवाब मिलने की उम्मीद थी। लेकिन सवालों के जवाब में नेता की ओर से विषय से हटकर भाषण और दूसरी बातें रखे जाने लगीं। छात्रा का सवाल कुछ और होता था, जबकि जवाब में अलग-अलग मुद्दों का जिक्र होने लगता था। इस कारण सवाल और जवाब के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा था।

इस दौरान छात्रा के सवालों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सवालों का सिलसिला आगे बढ़ने के साथ ही माहौल भी गर्म होता नजर आया। छात्रा की ओर से सीधे जवाब की अपेक्षा की जा रही थी, जबकि भाजपा नेता के जवाबों में भाषण का अंदाज अधिक दिखाई देने लगा। इससे कार्यक्रम में मौजूद युवाओं के बीच भी चर्चा शुरू हो गई कि जब युवाओं के सवालों का सामना करना है, तो उनके सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब भी दिया जाना चाहिए।

भाषण नहीं, सवालों का जवाब चाहते थे युवा

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी और नेताओं की जवाबदेही को लेकर एक अहम सवाल खड़ा कर दिया। आखिर जब किसी कार्यक्रम का आयोजन युवाओं से संवाद और प्रश्नोत्तरी के लिए किया जाता है, तो क्या वहां युवाओं के सवालों का सीधा जवाब देना नेताओं की जिम्मेदारी नहीं है? लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है और जनप्रतिनिधियों तथा राजनीतिक नेताओं से जवाब मांगना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान स्थिति ऐसी बनी कि आखिरकार प्रश्नोत्तरी सत्र को बंद करना पड़ा। इसके बाद यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया। छात्रा पुष्पा कुमारी के सवालों और भाजपा नेता के जवाब देने के तरीके को लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।

लोकतंत्र में सवालों से बचना कितना उचित?

मोतिहारी में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र केवल मंच से भाषण देने का नाम नहीं है, बल्कि जनता और युवाओं के सवालों को सुनने तथा उनका जवाब देने का भी नाम है। युवाओं को मंच देकर उनके सवाल आमंत्रित करना तभी सार्थक होगा, जब उन सवालों का जवाब भी स्पष्टता और गंभीरता से दिया जाए।

फिलहाल, छात्रा पुष्पा कुमारी और भाजपा नेता अखिलेश प्रसाद सिंह के बीच हुई यह सवाल-जवाब की स्थिति मोतिहारी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।