पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया प्रखंड के सेनवरिया गांव में उस वक्त पूरा माहौल भक्तिमय हो गया, जब नवनिर्मित भगवती मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धा, आस्था और उत्साह से सराबोर इस आयोजन में सैकड़ों महिलाओं और कुमारी कन्याओं ने भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
शनिवार को आयोजित इस कलश यात्रा की शुरुआत तुरकौलिया गांधी घाट से हुई, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जलयात्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गाजे-बाजे और भक्ति गीतों के साथ शोभायात्रा गांव की गलियों से गुजरती हुई आगे बढ़ी। इस दौरान कन्याएं सिर पर सजे कलश लिए कतारबद्ध चल रही थीं, जो दृश्य को अत्यंत मनमोहक और दिव्य बना रहा था।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के “जय माता दी” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। गांव के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया, जिससे माहौल और भी भावविभोर हो गया।
इस पावन अवसर पर आचार्य सर्वेश पाण्डेय, उपाचार्य नीरज मिश्र और ब्रह्मा राजकिशोर पाण्डेय के नेतृत्व में वैदिक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। आचार्य सर्वेश पाण्डेय ने अपने प्रवचन में कहा कि निष्काम भाव से किया गया यज्ञ ही सफल होता है, जबकि स्वार्थ भाव से किया गया यज्ञ निष्फल रहता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ के माध्यम से भगवान का सानिध्य प्राप्त होता है और यही सच्चा सुख एवं आनंद का स्रोत है।
वहीं उपाचार्य नीरज मिश्र ने कहा कि मंदिर केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं होता, बल्कि यह समाज की आस्था, एकता और संस्कृति का केंद्र होता है। उन्होंने कहा कि इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव से न केवल गांव में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा भी मिलेगी।
इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान लालबाबू पंडित बने हैं, जिन्होंने अपने परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि कलश स्थापना के साथ ही तीन दिवसीय विशेष पूजा-अनुष्ठान और महायज्ञ की शुरुआत हो चुकी है। इसके साथ ही प्रतिदिन शाम को भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।
पूरे पंचायत क्षेत्र में इस समय उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। आयोजन के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, समिति के सदस्य और ग्रामीणों ने मिलकर व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह भव्य कलश यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी संदेश देती नजर आई।










