पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी अंतर्गत तुरकौलिया प्रखंड क्षेत्र में आज आयोजित जनता दरबार प्रशासनिक सख्ती और जनसुनवाई का बड़ा मंच बनकर सामने आया। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात की मौजूदगी में आयोजित इस जनता दरबार में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और कुल 80 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें सबसे ज्यादा मामले जमीन संबंधी विवाद से जुड़े पाए गए, जो जिले में बढ़ते भू-विवाद की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
जनता दरबार के दौरान एसपी ने हर आवेदन को गंभीरता से सुनते हुए मौके पर मौजूद पुलिस पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। कई मामलों में तत्काल जांच के आदेश दिए गए, जबकि कुछ मामलों को संबंधित थानों को समयबद्ध निष्पादन के लिए भेजा गया। ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
जनता दरबार के बीच एक शराब से जुड़े केस ने सबका ध्यान खींचा। शिकायत में आरोप लगाया गया कि असली शराब माफिया को जेल भेजने के बजाय एक निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। यह मामला सामने आते ही एसपी स्वर्ण प्रभात ने कड़ा रुख अपनाया और तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
जांच के दौरान केस संख्या 25/26 और 26/26 में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर अनुसंधानकर्ता सुबोध कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एसडीपीओ दिलीप कुमार और संबंधित सर्किल इंस्पेक्टर को विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी क्रम में मोतिहारी पुलिस प्रशासन में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कदम उठाए गए। मुफस्सिल सर्किल इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मियों के वेतन पर रोक लगा दी गई है, जबकि एक पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
जनता दरबार में पहुंचे कई फरियादियों ने बताया कि वे लंबे समय से न्याय की उम्मीद में भटक रहे थे, लेकिन आज उन्हें सीधे एसपी के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जनता दरबार से पुलिस और जनता के बीच भरोसा मजबूत होता है।
एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कठोर दंड दिया जाएगा।
तुरकौलिया का यह जनता दरबार सिर्फ शिकायत सुनने का मंच नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता का एक मजबूत संदेश भी बनकर उभरा। अब देखना होगा कि जांच के बाद इस शराब केस में और क्या खुलासे होते हैं और आगे क्या कार्रवाई होती है।










