पुलिस मित्र बहाली के नाम पर लाखों की ठगी! एनजीओ-थानेदार गठजोड़ का बड़ा खुलासा, SIT जांच शुरू

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मोतिहारी में पुलिस मित्र बहाली के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसने युवाओं के सपनों के साथ-साथ कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक एनजीओ और कुछ थाना स्तर के लोगों की मिलीभगत से दर्जनों युवकों से 70 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की वसूली की गई। बदले में युवकों को फर्जी आई कार्ड और ज्वाइनिंग लेटर थमा दिया गया।

जब युवाओं को पूरे मामले की सच्चाई का पता चला, तो उनके बीच हड़कंप मच गया। फर्जी आई कार्ड लेकर युवक संबंधित एनजीओ संचालकों की तलाश में भटकते रहे। कई पीड़ित युवाओं ने बताया कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि थाना स्तर पर “पुलिस मित्र” के तौर पर उनकी नियुक्ति हो रही है और यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध है। इसी भरोसे में आकर युवाओं ने अपनी जमा पूंजी तक लगा दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कहा कि यदि सूक्ष्म तरीके से जांच की जाए तो बड़े खुलासे से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ निर्देश दिया है कि जिन युवाओं के साथ ठगी हुई है, वे संबंधित थाना में आवेदन दें या सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत करें। एसपी ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में कोटवा थाना में एक ठगी के शिकार युवक के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जांच को तेज करने के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया है। इस एसआईटी का नेतृत्व आईपीएस प्रोबेशनर हेमंत कर रहे हैं। टीम में साइबर डीएसपी और साइबर थाना की विशेष टीम को भी शामिल किया गया है, ताकि डिजिटल लेनदेन और नेटवर्क की गहराई से जांच हो सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल ठगी का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस फर्जी बहाली रैकेट का नेटवर्क कितना बड़ा है और किन-किन लोगों की इसमें संलिप्तता है। सूत्रों के अनुसार, कई और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।

फिलहाल पीड़ित युवक न्याय की उम्मीद में पुलिस की कार्रवाई पर नजर टिकाए हुए हैं। प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की बहाली या नौकरी के नाम पर पैसे देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें। यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सबकी निगाहें एसआईटी जांच पर टिकी हैं।