मोतिहारी में उर्वरक प्रतिष्ठानों पर कसा शिकंजा, दो दुकानों का लाइसेंस निलंबित

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मोतिहारी। किसानों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला कृषि प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में दिनांक 26 दिसंबर 2025 को जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण मोतिहारी मनीष कुमार सिंह के निर्देश के आलोक में प्रखंड कृषि पदाधिकारी, मोतिहारी द्वारा मोतिहारी प्रखंड अंतर्गत ढ़ेकहां बाजार में क्षेत्र भ्रमण कर उर्वरक प्रतिष्ठानों की सघन जांच की गई।

जांच के दौरान मे० मिश्रा बीज भंडार (प्रोपराइटर – जय प्रकाश मिश्रा) एवं मे० जायसवाल खाद बीज भंडार (प्रोपराइटर – प्रेम चन्द्र प्रसाद) के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि दोनों ही प्रतिष्ठानों पर डिस्प्ले बोर्ड, मूल्य तालिका एवं बिक्री पंजी उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों के अनुरूप सही ढंग से संधारित नहीं थे।

प्रखंड कृषि पदाधिकारी, मोतिहारी द्वारा इस संबंध में प्रतिवेदन जिला कृषि पदाधिकारी को समर्पित किया गया। प्रतिवेदन के आधार पर जिला कृषि पदाधिकारी  मनिश कुमार सिंह के स्तर से दोनों प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की गई है तथा संबंधित प्रतिष्ठानों से स्पष्टीकरण (पृच्छा) भी किया गया है।

इस कार्रवाई से क्षेत्र के उर्वरक विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, निर्धारित दरों का अनुपालन और अभिलेखों का संधारण अनिवार्य है।

श्री मनीष कुमार सिंह ने बताया कि उर्वरक प्रतिष्ठानों की नियमित एवं औचक जांच आगे भी लगातार जारी रहेगी। उन्होंने सभी उर्वरक विक्रेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 में निहित सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। ऐसा नहीं करने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

जिला कृषि पदाधिकारी ने यह भी कहा कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उर्वरक की कालाबाजारी, अधिक मूल्य वसूली या नियमों की अनदेखी करने वालों पर विभाग की पैनी नजर है।

इसी क्रम में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा स्वयं चिरैया एवं ढाका प्रखंड का भी भ्रमण किया गया, जहां विभिन्न उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच के दौरान विक्रेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए तथा अभिलेखों के सही संधारण, मूल्य तालिका के स्पष्ट प्रदर्शन और निर्धारित दरों पर ही उर्वरक बिक्री सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

कृषि विभाग की इस सख्त कार्रवाई से किसानों में संतोष देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि इसी प्रकार नियमित जांच होती रही तो उन्हें समय पर सही मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा और कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी।

कुल मिलाकर, जिला कृषि प्रशासन की यह पहल किसानों के हित में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है, जिससे उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।