सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने मोतिहारी में ऑपरेटिव बैंक की वार्षिक आमसभा को किया संबोधित

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मोतिहारी। बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार रविवार को मोतिहारी पहुंचे, जहां जिला केंद्रीय सहकारी बैंक की वार्षिक आम सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और उपस्थित सहकारिता पदाधिकारियों, प्रतिनिधियों एवं आमंत्रित अतिथियों को संबोधित करते हुए सहकारिता आंदोलन की प्रासंगिकता, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे।सभा में बोलते हुए मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि “सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि यह ग्रामीण भारत की आत्मा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सहकारिता की जड़ें गांव-गांव तक फैली हुई हैं और किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीण युवाओं के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

पैक्स को सशक्त और पारदर्शी बनाने की पहल

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि पैक्स को अब बहुउद्देश्यीय संस्थाओं में बदलने की दिशा में काम हो रहा है ताकि यह केवल ऋण वितरण तक सीमित न रहकर किसानों को खाद-बीज, फसल बीमा, भंडारण और विपणन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा सके।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि पैक्स स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है। सभी खातों को ऑनलाइन किया जा रहा है ताकि लेन-देन पूरी तरह निष्पक्ष और जवाबदेह हो सके।

एक पेड़ मां के नाम डॉ प्रेम कुमार आम का पेड़ कोऑपरेटिव बैंक में लगाते हुए
एक पेड़ मां के नाम डॉ प्रेम कुमार आम का पेड़ कोऑपरेटिव बैंक में लगाते हुए

डिफॉल्टर पैक्स पर सरकार की सख्ती

सभा में डॉ. कुमार ने डिफॉल्टर पैक्स को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जो समितियां नियमों के विपरीत कार्य कर रही हैं या समय पर किसानों और जमाकर्ताओं को सेवाएं देने में विफल हो रही हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है। सरकार ने ऐसे डिफॉल्टर पैक्स के सुधार हेतु ठोस दिशा-निर्देश जारी किए हैं और अधिकारियों को इस पर नियमित निगरानी रखने को कहा गया है।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सहकारिता की आड़ में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सहकारिता संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी समितियों को समयबद्ध ढंग से कार्य करना होगा।

सहकारिता से ग्रामीण विकास की नई राह

मंत्री ने कहा कि सहकारिता के जरिये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता खुलता है। बिहार सरकार की मंशा है कि सहकारी संस्थाओं को गांव की रीढ़ बनाया जाए, जिससे रोजगार, कृषि उत्पादन और किसानों की आमदनी में लगातार वृद्धि हो।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन इलाकों में सहकारी समितियां सक्रिय और ईमानदार हैं, वहां के किसानों को खाद-बीज समय पर मिल रहे हैं और खेती में लागत घटने के साथ ही पैदावार भी बढ़ रही है। ऐसे मॉडल को पूरे राज्य में लागू करने की कोशिशें हो रही हैं।

युवाओं को सहकारिता से जोड़ने की अपील

अपने संबोधन में डॉ. प्रेम कुमार ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सहकारिता से जुड़े और इसे आधुनिक तकनीक एवं नवाचार के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सहकारिता की सफलता युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। यदि नई पीढ़ी इसमें उत्साह से जुड़ती है तो यह आंदोलन और मजबूत होगा।

सभा में उमड़ा जनसैलाब

ऑपरेटिव बैंक की इस वार्षिक आमसभा में बड़ी संख्या में सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, किसान नेता, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे। मंत्री के आगमन पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन बैंक के पदाधिकारियों ने किया और धन्यवाद ज्ञापन बैंक के अध्यक्ष ने प्रस्तुत किया।

सरकार की स्पष्ट नीति

सभा के अंत में मंत्री डॉ. कुमार ने दोहराया कि सहकारिता आंदोलन को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता है। पैक्स और सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करके ही राज्य के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर स्तर पर सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।

मोतिहारी में आयोजित यह वार्षिक आमसभा न केवल सहकारिता आंदोलन की मजबूती का परिचायक रही बल्कि इससे यह संदेश भी गया कि सरकार और सहकारी संस्थान मिलकर ग्रामीण भारत को नई दिशा देने के लिए संकल्पित हैं।