पूर्वी चंपारण. श्रम संसाधन विभाग की ओर से बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के उद्देश्य से विभिन्न जगहों पर लगातार छापेमारी की जा रही है . इसका नेतृत्व श्रम परिवर्तन पदाधिकारी तुरकौलिया दिवाकर प्रसाद ने किया. छापेमारी के दौरान कोटवा और संग्रामपुर प्रखंड के श्रम अधीक्षक उमेश कुमार सिंह और कृतिवर्धन सिंह के साथ प्रयास संस्था से विजय कुमार शर्मा एवं तुरकौलिया थाना से 06 पुलिस कर्मी एवं एंटी ह्यूमन टै्रफिकिंग यूनिट की टीम ने तुरकौलिया क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों में जाकर सघन जांच की गई. इस दौरान 2 बाल श्रमिकों को बाल श्रम प्रतिबंधित कार्य करने से मुक्त कराया गया. मौके पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर केस भी दर्ज कराया गया.
दरअसल, इस जांच के क्रम में आदर्श स्वीट्स हाउस और कृष्णा स्वीट्स हाउस तुरकौलिया से 1 -1 बाल श्रमिकों को धावा दल की टीम के द्वारा विमुक्त कराया गया इस दौरान श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश ने यह स्पष्ट किया कि यह अभियान पूर्वी चंपारण जिले में लगातार जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत सभी प्रतिष्ठानों के विरूद्ध संबंधित थाने में केस दर्ज कराया गया है.
क्या है सजा का प्रावधान
श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश बताया कि मुक्त कराए गए सभी बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति मोतिहारी को सौंपकर बाल गृह में रखा गया है. श्रम अधीक्षक ने बताया कि बच्चों से प्रतिष्ठान में कार्य कराना बाल एवं किशोर श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन के अंतर्गत गैर कानूनी है. एक्ट के अंतर्गत बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों पर 20 से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना और 2 वर्षों तक का कारावास का भी प्रावधान है. इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में सभी नियोजकों से 20-20 हजार रुपए प्रति बाल श्रमिक की दर से राशि की वसूली की जाएगी.










