नोनिया कोरर गांव में नवजात मिलने से मचा हड़कंप, पुलिस और ग्रामीणों की तत्परता से बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी भेजा गया मासूम
पहाड़पुर, मोतिहारी | 18 अक्टूबर 2026।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर थाना क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है। नोनिया कोरर गांव में रविवार को एक नवजात शिशु लावारिस अवस्था में पाया गया। मासूम को इस हालत में देखकर स्थानीय ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने बिना देर किए इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और नवजात को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने की पहल शुरू की। पुलिसकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता से मासूम को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पहाड़पुर ले जाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया।
ग्रामीणों की सूचना पर तुरंत पहुंची डायल-112 की टीम
जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को पहाड़पुर थाना अंतर्गत नोनिया कोरर गांव में एक नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला। शिशु के मिलने की खबर गांव में फैलते ही लोग मौके पर जुटने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल डायल-112 पर सूचना दी।
सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 की टीम ने बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर नवजात को अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद मासूम को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पहाड़पुर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया।
बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी किया गया रेफर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के बाद नवजात की बेहतर चिकित्सा की आवश्यकता को देखते हुए उसे मोतिहारी रेफर कर दिया गया। इसके बाद पहाड़पुर थाना के दो सिपाहियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर मासूम को एम्बुलेंस के माध्यम से मोतिहारी भेजने में सहयोग किया।
इस दौरान पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों की तत्परता ने मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल पेश की। संकट की इस घड़ी में सभी ने नवजात को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सहयोग किया, ताकि मासूम को बेहतर इलाज मिल सके।
नवजात को लेकर उठ रहे कई सवाल
गांव में नवजात शिशु के लावारिस अवस्था में मिलने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इस मासूम को किसने और किन परिस्थितियों में वहां छोड़ा? क्या बच्चे को किसी मजबूरी के कारण छोड़ा गया या इसके पीछे कोई अन्य वजह है? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
घटना के बाद नवजात को अस्पताल पहुंचाकर बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी भेजा जाना राहत की बात है। हालांकि, बच्चे की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उसे छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान और घटना के पीछे की परिस्थितियों के संबंध में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
इंसानियत अभी जिंदा है!
नोनिया कोरर गांव की इस घटना में ग्रामीणों की संवेदनशीलता और पुलिसकर्मियों की तत्परता ने यह संदेश दिया कि किसी मासूम की जिंदगी बचाने के लिए समय पर उठाया गया एक कदम बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। अब सबकी नजर नवजात के स्वास्थ्य और मामले से जुड़ी आगे की जानकारी पर टिकी है।










