मोतिहारी जिला स्कूल मैदान में डिज्नीलैंड मेला विवादों में, अस्पताल और यातायात पर असर को लेकर उठे सवाल

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मोतिहारी। शहर के जिला स्कूल मैदान में 22 मई 2026 से आयोजित डिज्नीलैंड मेला एक ओर जहां लोगों के मनोरंजन का केंद्र बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर यह मेला लगातार विवादों के घेरे में भी है। मेले के आयोजन स्थल, यातायात व्यवस्था, अस्पताल पहुंचने में होने वाली परेशानी तथा अनुमति प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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उप महापौर ने किया था उद्घाटन

डिज्नीलैंड मेले का उद्घाटन नगर निगम के उप महापौर लालबाबू प्रसाद गुप्ता ने किया था।

उद्घाटन के दौरान उन्होंने मेले को शहर के लिए एक आकर्षक पर्यटन और मनोरंजन स्थल बताते हुए नगर निगम क्षेत्र एवं आसपास के पंचायतों के लोगों से मेले का आनंद लेने की अपील की थी।

आयोजकों के अनुसार यह भव्य मेला लगभग 45 दिनों तक संचालित होना है।

शुरुआत से ही विवादों में रहा मेला

मेले के आरंभ होने के साथ ही इसके आयोजन स्थल को लेकर सवाल उठने लगे।

स्थानीय लोगों और कुछ जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिला स्कूल मैदान बच्चों और युवाओं के खेलकूद के लिए महत्वपूर्ण स्थान है।

ऐसे में लंबे समय तक मैदान पर मेले का कब्जा रहने से खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

अजय आजाद ने उठाए गंभीर सवाल

उप महापौर पद के पूर्व प्रत्याशी अजय आजाद ने मेले के आयोजन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिला स्कूल मैदान के समीप ही मोतिहारी सदर अस्पताल स्थित है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि—अस्पताल के पास भारी भीड़ जुटने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी हो रही है।

शाम के समय मेले में आने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ जाती है।

अस्पताल जाने वाले मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने से आवागमन प्रभावित होता है।

ठेला और खोमचा दुकानदारों की भीड़ से बढ़ी समस्या

आरोप है कि जिला स्कूल गेट और मेले के आसपास बड़ी संख्या में ठेला एवं खोमचा दुकानदार अपनी दुकानें लगाने लगे हैं।

गुपचुप, चाट, आइसक्रीम तथा अन्य खाद्य सामग्री की बिक्री के कारण शाम के समय वहां अत्यधिक भीड़ जमा हो जाती है।

इससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और अस्पताल आने-जाने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ध्वनि प्रदूषण पर भी उठे सवाल

मेले में लगे झूलों और मनोरंजन कार्यक्रमों के दौरान तेज ध्वनि में संगीत बजाया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को असुविधा होती है।

अस्पताल के शांत वातावरण पर भी इसका असर पड़ने की बात कही जा रही है।

अनुमति प्रक्रिया पर उठे प्रश्न

जन सुराज के प्रवक्ता अजय आजाद ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि—

जिला स्कूल मैदान में मेला लगाने की अनुमति किस विभाग ने दी?

आयोजन के लिए किन शर्तों के तहत स्वीकृति प्रदान की गई?

अस्पताल और यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया गया था या नहीं?

सुरक्षा, पार्किंग और भीड़ नियंत्रण के लिए क्या व्यवस्था की गई है?

प्रशासनिक जवाब का इंतजार

विवाद के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हुई है। नागरिकों का कहना है कि मनोरंजन के साथ-साथ मरीजों की सुविधा, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक हित को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। फिलहाल मेले को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।