रघुनाथपुर वार्ड 29 में महिलाएं फिर लौटीं चूल्हे पर, मुफ्त कनेक्शन के बाद भी रिफिल बना बोझ

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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य था कि देश की गरीब महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिले और उन्हें स्वच्छ ईंधन उपलब्ध हो। योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन, सिलेंडर और चूल्हा उपलब्ध कराया गया। शुरुआत में इस योजना को लेकर गांव-गांव में खुशी की लहर थी। महिलाओं को लगा कि अब उन्हें धुएं से भरे रसोईघर से छुटकारा मिलेगा और उनका स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।

लेकिन समय के साथ बढ़ती गैस की कीमतों ने इस खुशी को चिंता में बदल दिया है। रघुनाथपुर वार्ड नंबर 29 की निवासी पिंकी देवी बताती हैं कि शुरुआत में गैस मिलने से काफी सहूलियत हुई, लेकिन अब सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है, “गैस का दाम इतना बढ़ गया है कि हर महीने सिलेंडर भरवाना संभव नहीं हो पाता। मजबूरी में फिर से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है।”

पिंकी देवी आगे कहती हैं कि चूल्हे के लिए लकड़ी की व्यवस्था किसी न किसी तरह हो जाती है। आसपास के जंगल, झाड़ियों या खेत-खलिहानों से लकड़ी मिल जाती है। हालांकि यह मेहनत भरा काम है, लेकिन गैस के भारी खर्च से सस्ता पड़ता है। वहीं गैस रिफिल के लिए एकमुश्त बड़ी रकम चुकानी पड़ती है, जो गरीब परिवारों के बजट पर भारी पड़ती है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा कनेक्शन तो मुफ्त दे दिया गया, लेकिन रिफिल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना संभव नहीं हो पा रहा है। कई घरों में गैस सिलेंडर रसोई के एक कोने में रखा रहता है, जबकि खाना लकड़ी के चूल्हे पर ही बनता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लकड़ी के धुएं से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। आंखों में जलन, सांस की तकलीफ और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में उज्ज्वला योजना का मूल उद्देश्य तभी सफल होगा जब लाभार्थी नियमित रूप से गैस का उपयोग कर सकें।

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार को गैस रिफिल की कीमतों पर विशेष सब्सिडी देनी चाहिए, ताकि गरीब परिवार भी बिना आर्थिक दबाव के गैस का उपयोग कर सकें। उनका कहना है कि यदि रिफिल सस्ता होगा तो वे निश्चित रूप से लकड़ी के चूल्हे को छोड़कर गैस पर ही खाना बनाएंगे।

रघुनाथपुर वार्ड 29 की स्थिति यह संकेत देती है कि केवल कनेक्शन वितरण से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। जरूरत है कि योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी ध्यान दिया जाए। उज्ज्वला योजना की सफलता तभी मानी जाएगी जब हर रसोई में गैस जले और महिलाओं को धुएं से पूरी तरह मुक्ति मिले। फिलहाल बढ़ती कीमतों ने इस योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।