सांख्यिकी स्वयंसेवकों के समायोजन पर सरकार करेगी विचार: विधानसभा में उठा पुराना मुद्दा, मंत्री का बड़ा बयान

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वर्ष 2012-13 में बिहार सरकार द्वारा बहाल किए गए सांख्यिकी स्वयंसेवकों का मुद्दा एक बार फिर विधानसभा में गूंजा। 2016 में इन स्वयंसेवकों की सेवा निरस्त किए जाने के बाद से हजारों परिवार प्रभावित हुए थे, और लंबे समय से ये लोग समायोजन की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। अब इस विषय पर सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद स्वयंसेवकों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

विधानसभा के चालू सत्र में हरसिद्धि से विधायक सह पूर्व गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णदन पासवान ने इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी स्वयंसेवकों की बहाली सरकार की ही नीति के तहत हुई थी, ऐसे में अचानक सेवा समाप्त कर देना युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। पासवान ने सदन में मांग की कि सरकार मानवीय आधार पर इन स्वयंसेवकों के पुनर्समायोजन पर ठोस निर्णय ले।

इसी मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए पालीगंज के विधायक समीर सौरभ ने भी सरकार से स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने वाले युवाओं को बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ रही है, जबकि राज्य को प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता है। ऐसे में इन स्वयंसेवकों का अनुभव राज्य के विकास कार्यों में उपयोगी साबित हो सकता है।

विधायकों के सवाल का जवाब देते हुए सांख्यिकी मंत्री विजय चंद्र प्रसाद ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है। मंत्री ने कहा कि सांख्यिकी स्वयंसेवकों के समायोजन के प्रश्न पर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा और व्यावहारिक समाधान तलाशने का प्रयास होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार युवाओं के हितों की अनदेखी नहीं करेगी।

मंत्री के इस बयान के बाद वर्षों से आंदोलनरत स्वयंसेवकों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय सामने आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समायोजन की दिशा में कदम उठाया जाता है, तो इससे न केवल प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य की सांख्यिकीय व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सांख्यिकी स्वयंसेवक और उनके परिवार उम्मीद कर रहे हैं कि विधानसभा में उठी यह आवाज़ केवल आश्वासन तक सीमित न रह जाए, बल्कि जल्द ही ठोस नीति के रूप में सामने आए।