पूर्वी चंपारण। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के लिए यह क्षण केवल सम्मान का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी दक्षता, पारदर्शिता और नवाचार का राष्ट्रीय प्रमाण है। चुनाव प्रबंधन में उत्कृष्टता के लिए पूर्वी चंपारण जिला को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ जिले के प्रशासनिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है, बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय बन गई है।

लोकसभा चुनाव 2024 में बेहतरीन और अनुकरणीय चुनाव प्रबंधन के बाद, अब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी पूर्वी चंपारण ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए पूर्वी चंपारण जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सह जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान 25 जनवरी 2026, राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा जिला निर्वाचन पदाधिकारी, पूर्वी चंपारण को प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर दिया जाने वाला यह पुरस्कार भारतीय लोकतंत्र में चुनावों के सफल संचालन, नवाचार, पारदर्शिता और मतदाता सहभागिता को बढ़ावा देने वाले जिलों को सम्मानित करने की सर्वोच्च श्रेणी का सम्मान माना जाता है।
उत्कृष्ट चुनाव प्रबंधन का राष्ट्रीय उदाहरण
पूर्वी चंपारण को यह पुरस्कार चुनावों के संचालन में बेहतर प्रबंधन, आईटी आधारित पहल, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता जागरूकता अभियान और चुनाव प्रबंधन में नवाचारों के लिए प्रदान किया जा रहा है। जिले में मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई गई रणनीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान जहां देश के कई जिलों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, वहीं पूर्वी चंपारण ने सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावी मतदान प्रबंधन और तकनीकी नवाचारों के बल पर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी जिले ने अपनी प्रशासनिक क्षमता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
लगातार दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार – बिहार के लिए गर्व
पूर्वी चंपारण का यह लगातार दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार बिहार के लिए विशेष रूप से गौरव का विषय है। वर्ष 2025 में लोकसभा चुनाव के दौरान बेहतर चुनाव प्रबंधन के लिए देशभर के जिलों में से पूर्वी चंपारण को चुना गया था। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन वर्ष 2026 में पुनः राष्ट्रीय सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि जिले की यह सफलता संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित और सतत प्रयासों का परिणाम है।
यह सम्मान दर्शाता है कि बिहार का प्रशासनिक तंत्र, विशेषकर पूर्वी चंपारण जिला, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का अक्षरशः पालन, तकनीक का बेहतर उपयोग और मानव संसाधनों का कुशल प्रबंधन – इन सभी ने जिले को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया है।
तकनीक और नवाचार ने बदली चुनावी तस्वीर
पूर्वी चंपारण में चुनाव प्रबंधन के दौरान तकनीकी प्रगति का प्रभावी उपयोग किया गया। आईटी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, रियल टाइम रिपोर्टिंग, डिजिटल संचार माध्यमों के जरिए मतदान कर्मियों का समन्वय और मतदाता सहायता तंत्र को मजबूत किया गया। इसके साथ ही संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी, वेबकास्टिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती ने चुनावों को शांतिपूर्ण और विश्वसनीय बनाया।
मतदाता जागरूकता के लिए चलाए गए अभियानों ने भी अहम भूमिका निभाई। युवाओं, महिलाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर भव्य सम्मान
राष्ट्रीय मतदाता दिवस भारतीय लोकतंत्र का उत्सव माना जाता है। यह दिवस राष्ट्रीय, राज्य, जिला, निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र स्तर पर मनाया जाता है, जिससे यह देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजनों में से एक बन जाता है। इसी अवसर पर पूर्वी चंपारण को यह राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
यह पुरस्कार भारतीय चुनावों की भव्यता, चुनाव सुधारों, तकनीकी प्रगति और चुनाव प्रबंधन में किए गए नवीन प्रयोगों को प्रदर्शित करता है। पूर्वी चंपारण का चयन इस बात का संकेत है कि जिला प्रशासन ने चुनावों को केवल एक संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर माना।
सामूहिक प्रयासों की जीत
इस सम्मान के पीछे जिला प्रशासन के सभी कर्मियों की मेहनत, समर्पण और निष्ठा है। मतदान कर्मियों से लेकर पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों, आईटी टीम और स्वयंसेवकों तक – सभी ने मिलकर चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाया। इसके साथ ही जिले के जागरूक नागरिकों का सहयोग भी इस उपलब्धि का मजबूत आधार है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र और जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। प्रशासन और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया है।
लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण
पूर्वी चंपारण को लगातार दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष चुनावों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह सम्मान न केवल बीते चुनावों की सफलता का प्रतीक है, बल्कि भविष्य में और बेहतर चुनाव प्रबंधन के लिए प्रेरणा भी है।
बिहार जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में इस तरह की उपलब्धि यह संदेश देती है कि सही नेतृत्व, मजबूत प्रशासन और जनता के सहयोग से लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
पूर्वी चंपारण – लोकतंत्र की नई पहचान
लगातार दो बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होकर पूर्वी चंपारण ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और लोकतांत्रिक मजबूती के मामले में भी देश के अग्रणी जिलों में शामिल है।
यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनेगी और बिहार को चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान दिलाएगी। पूर्वी चंपारण का यह गौरवपूर्ण सफर लोकतंत्र की मजबूती और प्रशासनिक उत्कृष्टता का जीवंत उदाहरण है।








