मोतिहारी/पटना। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जैसी जनकल्याणकारी योजना में फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड अंतर्गत ग्राम रामपुर का है, जहां पक्का मकान और पर्याप्त जमीन होने के बावजूद एक व्यक्ति ने झोपड़ी दिखाकर सरकारी आवास योजना का लाभ उठा लिया। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
विभागीय लोक शिकायत निवारण, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-108/25 दिनांक-13.11.2025 के माध्यम से यह गंभीर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ता अशरफ अली, ग्राम-रामपुर, पोस्ट व प्रखंड-केसरिया, जिला-पूर्वी चंपारण द्वारा द्वितीय अपील अनन्य संख्या-402110203062500853/2A के तहत यह आरोप लगाया गया कि मो. सफीउल्लाह, ग्राम-रामपुर, पोस्ट-केसरिया के पास पहले से पक्का मकान है और लगभग 5 बीघा जमीन भी मौजूद है, फिर भी उन्होंने दूसरे की झोपड़ी दिखाकर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का लाभ प्राप्त कर लिया।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच वरीय लेखा पदाधिकारी, डीआरडीए, मोतिहारी से कराई गई। जांच प्रतिवेदन सामने आते ही यह साफ हो गया कि शिकायत निराधार नहीं बल्कि पूरी तरह से सही थी। जांच में पाया गया कि लाभुक मो. सफीउल्लाह (PMAY-G ID-BH141198805), ग्राम-रामपुर कोडर, ग्राम पंचायत राज-ताजपुर पठखौलिया, प्रखंड-केसरिया को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रथम किस्त के रूप में 40,000 रुपये का भुगतान 25 अप्रैल 2025 को किया गया था।
लेकिन जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार लाभुक का चार कमरों वाला, लंबा बरामदा, बड़ा हॉल सहित छतदार पक्का मकान मौजूद है, जो करीब 8 से 9 वर्ष पुराना प्रतीत होता है। स्पष्ट है कि लाभुक किसी भी सूरत में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र नहीं था।
इसके बावजूद लाभुक द्वारा गलत शपथ पत्र देकर खुद को अयोग्य होते हुए भी पात्र दिखाया गया और सरकारी योजना का लाभ ले लिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और बेघर लोगों के हक पर सीधा डाका है।
मामले में प्रशासन ने संबंधित कर्मियों की भूमिका को भी गंभीरता से लिया। जांच के बाद संबंधित आवास सहायक श्री अजय चौधरी, पंचायत-ताजपुर पठखौलिया एवं संबंधित आवास पर्यवेक्षक श्रीकांत, प्रखंड-केसरिया से स्पष्टीकरण मांगा गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी, केसरिया को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अयोग्य लाभुक से प्रथम किस्त की राशि वापस लेकर संबंधित खाते में जमा कराई जाए और उसका नाम प्राथमिकता सूची से हटाया जाए।
प्रखंड विकास पदाधिकारी, केसरिया द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि अयोग्य लाभुक मो. सफीउल्लाह से 40,000 रुपये की प्रथम किस्त की राशि वापस लेकर राज्य नोडल खाते (State Nodal Account) में जमा करा दी गई है। साथ ही उसका नाम आवास योजना की सूची से विलोपित कर दिया गया है।
हालांकि, केवल राशि की वसूली तक प्रशासन सीमित नहीं रहा। पूरे मामले की समीक्षा के बाद संबंधित कर्मियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को अस्वीकृत कर दिया गया और विभागीय कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में यह संदेश साफ है कि लापरवाही और मिलीभगत को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के तहत श्रीकांत, ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक, प्रखंड-केसरिया (HRMS ID-114203) पर बीआरडीएस के नियमों के अनुरूप विभागीय पत्रांक-196 दिनांक-25.03.2022 के प्रावधानित कंडिका 1 (i) के तहत लिखित चेतावनी का दंड अधिरोपित किया गया है।
वहीं, श्री अजय चौधरी, ग्रामीण आवास सहायक, पंचायत-ताजपुर पठखौलिया, प्रखंड-केसरिया (HRMS ID-114109) पर और भी सख्त कार्रवाई की गई है। बीआरडीएस के नियमों के अनुरूप विभागीय पत्रांक-196 दिनांक-25.03.2022 के प्रावधानित कंडिका 1 (iv) के तहत उनके मूल मानदेय से 10 प्रतिशत की कटौती एक वर्ष तक करने का दंड लगाया गया है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गरीबों के लिए बनी योजनाओं में ऐसे लोग कैसे सेंध लगा रहे हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान और जमीन मौजूद है। साथ ही यह भी सोचने की जरूरत है कि अगर शिकायत नहीं होती तो क्या यह फर्जीवाड़ा कभी सामने आता?
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कार्यक्रम तभी सफल होंगे, जब जमीनी स्तर पर ईमानदारी से सत्यापन किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि यदि निगरानी में थोड़ी सी भी ढिलाई हुई तो योजनाओं का लाभ गलत हाथों में चला जाएगा और वास्तविक जरूरतमंद फिर से ठगे जाएंगे।
फिलहाल, प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसे मामलों पर और सख्ती बरती जाएगी, ताकि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन्हीं लोगों तक पहुंचे, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है।








