मोतिहारी। शहर को कचरा मुक्त और स्वच्छ बनाने के बड़े दावों के साथ जमला में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया कचरा सेग्रीगेशन प्लांट आज सवालों के घेरे में है। आधुनिक तकनीक से लैस इस प्लांट से उम्मीद थी कि शहर के गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान होगा, लेकिन एक जरूरी इंसुलेटर नहीं लगाए जाने से पूरा सिस्टम ही चरमरा गया।
जानकारी के मुताबिक, लगभग 60 लाख रुपये की लागत वाला इंसुलेटर शुरू से ही प्लांट में नहीं लगाया गया। यह इंसुलेटर बिजली सुरक्षा और मशीनों के सुचारु संचालन के लिए बेहद जरूरी था। इसके अभाव में मशीनों पर तकनीकी दबाव बढ़ा, खराबी आई और देखते ही देखते हाई-टेक उपकरणों की वारंटी भी खत्म हो गई। नतीजा यह हुआ कि प्लांट बार-बार ठप होने लगा और अंततः लंबे समय तक बंद रहा।
यह प्लांट करीब दो साल की देरी के बाद 28 सितंबर 2023 को शुरू किया गया था। उद्घाटन के वक्त नगर निगम ने दावा किया था कि शहर की सड़कों और मोहल्लों से कचरे के ढेर खत्म हो जाएंगे। कुछ समय तक काम भी हुआ, लेकिन तकनीकी खामियों और अधूरी तैयारियों ने इन दावों की पोल खोल दी।
प्लांट के बंद रहने से शहर के कई इलाकों में कचरा उठाव प्रभावित हुआ है। जगह-जगह कूड़े के ढेर, दुर्गंध और मच्छरों की समस्या से लोग परेशान हैं। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो प्लानिंग और मॉनिटरिंग में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
मामले पर उप मेयर ने माना कि प्लांट अपेक्षित रूप से काम नहीं कर पा रहा और तकनीकी खामियां रही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय होने और प्लांट के पूरी क्षमता से चालू होने का इंतजार कर रही है।
जमला का यह कचरा प्लांट अब मोतिहारी में विकास कार्यों की जवाबदेही और सार्वजनिक धन के सही इस्तेमाल का बड़ा सवाल बन चुका है।










