बिहार राज्य पेंशनर समाज पूर्वी चंपारण में सर्वसम्मति से चुनाव सम्पन्न, सोमेश्वर गिरी बने अध्यक्ष, देवेंद्र कुमार सिंह को मिली सचिव की कमान

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पूर्वी चंपारण जिले में बिहार राज्य पेंशनर समाज का चुनाव पूरी मजबूती, एकजुटता और संगठनात्मक जोश के साथ सम्पन्न हुआ। यह चुनाव केवल पदों का चयन नहीं, बल्कि पेंशनरों के अधिकार, सम्मान और संघर्ष की नई दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक फैसला साबित हुआ। जिले भर से जुटे पेंशनरों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब उनके हक की आवाज संगठित और आक्रामक तरीके से उठेगी।

चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और सर्वसम्मति के साथ पूरी की गई। किसी भी प्रकार का विरोध या मतभेद सामने नहीं आया, जो इस बात का प्रमाण है कि संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर पूरी सहमति और विश्वास मौजूद है। तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए 21 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसे पेंशनरों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ और अनुभवी पेंशनर सोमेश्वर गिरी को सर्वसम्मति से चुना गया, जबकि संगठन की प्रशासनिक और आंदोलनात्मक जिम्मेदारी निभाने के लिए देवेंद्र कुमार सिंह को सचिव पद की कमान दी गई। दोनों नेताओं के नाम पर सहमति बनते ही सभा स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पेंशनरों ने साफ शब्दों में कहा कि अब संगठन केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क से लेकर शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज मजबूती से पहुंचाएगा।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष सोमेश्वर गिरी ने अपने संबोधन में कहा कि पेंशनर समाज वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहा है। समय पर पेंशन भुगतान, महंगाई राहत, चिकित्सा सुविधा और सम्मानजनक जीवन पेंशनरों का अधिकार है, कोई भीख नहीं। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने पेंशनरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

वहीं सचिव देवेंद्र कुमार सिंह ने आक्रामक लहजे में कहा कि अब फाइलों में दबकर पेंशनरों की आवाज नहीं दबाई जा सकती। हर विभाग में लंबित मामलों, विसंगतियों और भेदभाव के खिलाफ संगठित संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आंदोलन तेज किया जाएगा।

चुनाव के दौरान यह भी तय किया गया कि संगठन नियमित बैठकें करेगा, समस्याओं का दस्तावेजीकरण किया जाएगा और प्रशासन के समक्ष ठोस मांग पत्र रखा जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन के जरिए दबाव बनाया जाएगा। 21 सदस्यीय कार्यकारिणी में अनुभवी, जुझारू और सक्रिय पेंशनरों को शामिल किया गया है, जिससे संगठन की ताकत और प्रभावशीलता और बढ़ गई है।

सभा में मौजूद पेंशनरों ने कहा कि यह चुनाव संगठन के लिए नया मोड़ है। अब न तो पेंशनरों की अनदेखी बर्दाश्त की जाएगी और न ही उनके अधिकारों से समझौता होगा। एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है और इसी ताकत के बल पर सरकार को जवाबदेह बनाया जाएगा।

कुल मिलाकर, बिहार राज्य पेंशनर समाज जिला पूर्वी चंपारण का यह चुनाव पेंशनरों के संघर्ष की नई शुरुआत है। सर्वसम्मति से चुना गया नेतृत्व अब उम्मीदों, जिम्मेदारियों और आंदोलन की आग के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।