सीकरीया फार्मेसी कॉलेज में राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह का भव्य समापन, वैक्सीनेशन में फार्मासिस्ट की भूमिका पर दिया गया जोर

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मोतिहारी। सीकरीया फार्मेसी कॉलेज, मोतिहारी में 22 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। समापन समारोह में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष शरण, भाजपा नेत्री डॉ. हीना चंद्रा, वरिष्ठ पत्रकार प्रो. चन्द्रभूषण पाण्डेय, कॉलेज के सचिव एवं भाजपा युवा नेता यमुना कुमार सीकरीया तथा कॉलेज की प्राचार्य प्रीति दुबे ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर IMA अध्यक्ष डॉ. आशुतोष शरण ने वैक्सीन और उसके उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन आज के समय में स्वास्थ्य सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी है। डॉ. शरण ने छात्रों को नए-नए विकसित हो रहे वैक्सीन, उनकी कार्यप्रणाली और भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में उनकी बढ़ती भूमिका के बारे में भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के छात्र आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ साबित होंगे।

भाजपा नेत्री डॉ. हीना चंद्रा ने फार्मेसी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों की भूमिका अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे की पूरक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां डॉक्टर रोग का निदान करता है, वहीं फार्मासिस्ट सही दवा, सही मात्रा और सही जानकारी देकर मरीज के उपचार को पूर्ण करता है। उन्होंने फार्मेसी छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा के रूप में अपनाएं।

वरिष्ठ पत्रकार प्रो. चन्द्रभूषण पाण्डेय ने कहा कि फार्मेसी का दायरा अत्यंत व्यापक है। दवा निर्माण से लेकर वितरण, रिसर्च, वैक्सीनेशन और जन-जागरूकता तक फार्मासिस्ट की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में फार्मेसी क्षेत्र में रोजगार और सेवा के अपार अवसर उपलब्ध होंगे।

कॉलेज के सचिव यमुना कुमार सीकरीया ने अपने संबोधन में बताया कि राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह का आयोजन भारत सरकार के उपक्रम, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार “फार्मासिस्ट एज द एडवोकेट ऑफ वैक्सीनेशन” थीम पर किया गया था, जिसका आज सफल समापन हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है। फार्मासिस्ट डॉक्टर और मरीज के बीच एक सशक्त सहायक कड़ी है, जिसकी भूमिका कई बार डॉक्टर से भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि देशभर में अब तक 17,610 जनऔषधि केंद्र खोले जा चुके हैं और मार्च 2027 तक इनकी संख्या 25,000 करने का लक्ष्य सरकार ने निर्धारित किया है। इन केंद्रों के माध्यम से आम लोगों को 75 प्रतिशत तक सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आज वैक्सीनेशन अभियान में फार्मासिस्ट एक अधिवक्ता की तरह लोगों को जागरूक कर अहम भूमिका निभा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा रंगोली, पोस्टर निर्माण एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। समापन समारोह ने छात्रों में नई ऊर्जा और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव भर दिया।