पूर्वी चंपारण में शीत लहर का कहर, 21 दिसंबर 2025 तक सभी शिक्षण संस्थान बंद

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पूर्वी चंपारण जिले में लगातार बढ़ रही ठंड और शीत लहर के प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए जिला प्रशासन, पूर्वी चंपारण द्वारा जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा कोचिंग संस्थानों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों पर पूर्णतः रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दिनांक 21 दिसंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा।

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान मौसम की गंभीर स्थिति, अत्यधिक ठंड, घना कोहरा और शीत लहर बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। खासकर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग इस मौसम में अधिक संवेदनशील होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ठंड एवं मौसम की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि मौसम में और अधिक गिरावट या शीत लहर की तीव्रता बढ़ती है, तो इसके बाद आगे के दिनों के लिए भी आवश्यकतानुसार निर्णय लिया जाएगा। वहीं यदि मौसम में सुधार होता है, तो स्थिति की समीक्षा के बाद ही शिक्षण संस्थानों को पुनः खोलने पर विचार किया जाएगा।

इस दौरान सभी विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालकों को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की है कि वे बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें और ठंड से बचाव के सभी आवश्यक उपाय करें।

जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे बच्चों और बुजुर्गों को ठंड के सीधे संपर्क में आने से बचाएं। गर्म कपड़े पहनाएं, सुबह-शाम बाहर निकलने से परहेज करें और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए जा रहे दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अत्यधिक ठंड में सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। जिला प्रशासन का यह निर्णय जनहित में उठाया गया कदम है, ताकि जिले के बच्चों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

फिलहाल जिले में शीत लहर का असर बरकरार है और ठंड से राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। ऐसे में प्रशासन की इस पहल को अभिभावकों और आमजन द्वारा सराहा जा रहा है।