मोतिहारी में पहली बार होगा दिव्य संगीतमय श्री चित्रगुप्त कथा का भव्य आयोजन, स्वयं श्री श्री 1008 चित्रगुप्ताचार्य सच्चिदानंद जी करेंगे वाचन

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मोतिहारी, बिहार: मोतिहारीवासियों के लिए यह बड़े ही सौभाग्य और हर्ष का विषय है कि आगामी 15 जून 2025, रविवार को नगर के पावन स्थल नरसिंह बाबा मंदिर प्रांगण में पहली बार दिव्य संगीतमय श्री चित्रगुप्त कथा का आयोजन होने जा रहा है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि कथावाचक स्वयं श्री श्री 1008 श्री चित्रगुप्ताचार्य स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज होंगे, जो कि श्री चित्रगुप्त पीठ, वृंदावन के संस्थापक भी हैं।

यह आयोजन मोतिहारी के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिदृश्य में ऐतिहासिक रूप से एक नई पहचान स्थापित करेगा। आयोजन का शुभारंभ रविवार, सुबह 11 बजे से होगा और इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।

कौन हैं श्री श्री 1008 श्री चित्रगुप्ताचार्य स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज?

श्री चित्रगुप्ताचार्य स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज एक आध्यात्मिक पुरुष हैं, जिन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष में चित्रगुप्त जी महाराज की महिमा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। वे श्री चित्रगुप्त पीठ, वृंदावन के संस्थापक हैं और जीवनभर धर्म, सेवा और समाज कल्याण के पथ पर अग्रसर हैं। उनकी वाणी में ओज है, भावनाओं में गहराई है और कथाओं में भक्ति की धारा प्रवाहित होती है।

उनके द्वारा की जाने वाली संगीतमय कथा सिर्फ कथा नहीं होती, बल्कि एक अलौकिक अनुभूति होती है। वे श्रद्धालुओं को न केवल भगवान चित्रगुप्त की लीलाओं से जोड़ते हैं, बल्कि उनके संदेशों को जीवन में उतारने की प्रेरणा भी देते हैं

क्यों विशेष है यह कथा?

यह कथा इस मायने में भी विशेष है कि यह चित्रगुप्त धर्म के अनुयायियों के लिए एक आध्यात्मिक चेतना का अवसर है। श्री चित्रगुप्त जी को धर्मराज यमराज के सचिव और कर्मों के लेखाकार के रूप में जाना जाता है। उनकी कथा जीवन को नई दृष्टि देती है—जहां व्यक्ति अपने कर्मों को लेकर सजग होता है और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

कथा के दौरान भजन, कीर्तन, प्रसंग और उपदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान चित्रगुप्त की महिमा का दर्शन होगा। संगीतमय शैली में होने के कारण कथा भावविभोर कर देने वाली होगी, जो श्रोताओं के हृदय को छू लेगी।

आयोजन स्थल: नरसिंह बाबा मंदिर प्रांगण, मोतिहारी

मोतिहारी के नरसिंह बाबा मंदिर को इस आयोजन के लिए चुना गया है जो कि एक धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का स्थल है। मंदिर प्रांगण को सजाने-संवारने की तैयारियाँ युद्धस्तर पर जारी हैं। स्थानीय श्रद्धालु, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक वर्ग द्वारा आयोजन में सहयोग किया जा रहा है।

आयोजन समिति की तैयारी

आयोजन समिति के सदस्य दिन-रात एक करके कार्यक्रम को भव्य और सफल बनाने में जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल व्यवस्था, पंडाल, बैठने की सुविधा, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था आदि की समुचित व्यवस्था की जा रही है।

इसके अलावा कथा के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया, पोस्टर-बैनर और जनसम्पर्क के माध्यम से लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजन से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि “यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी होगा। हम चाहते हैं कि हर वर्ग और आयु के लोग इसमें भाग लें और इसका लाभ उठाएं।”

जिलेभर से श्रद्धालु होंगे शामिल

मोतिहारी ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। कई श्रद्धालु ऐसे हैं जो वृंदावन से स्वामी जी का प्रवचन सुन चुके हैं और अब मोतिहारी में होने वाले इस आयोजन को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं।

क्या मिलेगा इस कथा से?

यह कथा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान होगी, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण भी होगी। आज के समय में जब समाज तनाव, भौतिकता और नैतिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में चित्रगुप्त जी की कथा लोगों को आत्ममंथन, आत्मसंयम और धर्म की ओर लौटने की प्रेरणा देगी।