बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर राष्ट्रगान अपमान का आरोप, मुजफ्फरपुर कोर्ट में मामला दर्ज

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मुजफ्फरपुर की एसीजेएम पश्चिमी कोर्ट में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ राष्ट्रगान के अपमान के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ है। आरोप है कि 20 मार्च को एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान मुख्यमंत्री का आचरण अनुचित था, जिससे देशभक्ति की भावना को ठेस पहुंची। इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री से माफी की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 20 मार्च की बताई जा रही है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। आरोप है कि राष्ट्रगान के दौरान उन्होंने अनुचित व्यवहार किया, जो कि राष्ट्रगान के सम्मान के खिलाफ था। इस मुद्दे को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस छिड़ गई है।

मुजफ्फरपुर के अधिवक्ता सुधीर ओझा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस पर अदालत ने संज्ञान लिया और केस को आगे बढ़ाया। मुकदमा भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधि विरुद्ध आदेश की अवहेलना) और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत दर्ज किया गया है।

विपक्ष ने साधा निशाना

जैसे ही यह मामला सामने आया, विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD)  ने इसे देशभक्ति का अपमान करार दिया और मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की।

वहीं, RJD के प्रवक्ता ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और इसे सत्ता के अहंकार का परिणाम बताया।

सरकार का क्या कहना है?

सरकारी पक्ष से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जेडीयू (JDU) के कुछ नेताओं ने इस मामले को अनावश्यक विवाद करार दिया। उनका कहना है कि विपक्षी दल बेवजह इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं और मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिश कर रहे है

क्या कहता है कानून?

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रगान या राष्ट्रीय ध्वज का अपमान एक दंडनीय अपराध है। इस कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान का अपमान करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।