मोतिहारी आज के डिजिटल युग में, सोशल मीडिया एक प्रमुख संचार माध्यम बन गया है, लेकिन इसके साथ ही अश्लील सामग्री (Pornographic Content) की उपस्थिति एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। यह न केवल नैतिक मूल्यों को कमजोर कर रही है, बल्कि बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल रही है।
बच्चों और किशोरों पर प्रभाव
सोशल मीडिया पर उपलब्ध आपत्तिजनक सामग्री किशोरों को गलत दिशा में ले जा सकती है। उनके मनोवैज्ञानिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे उनके आत्मविश्वास, नैतिकता और समाज के प्रति दृष्टिकोण पर प्रभाव पड़ सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: अत्यधिक अश्लील सामग्री देखने से किशोरों में अवसाद, चिंता और यौनिकता को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
आदत और लत: कई शोधों में यह सामने आया है कि अश्लील सामग्री की निरंतर खपत किशोरों को इसकी लत लगाने पर मजबूर कर सकती है, जिससे उनके व्यक्तिगत और शैक्षणिक जीवन पर असर पड़ता है।
अवैध गतिविधियों की संभावना: बच्चों के मानसिक विकास पर असर डालने के अलावा, यह उन्हें गलत गतिविधियों की ओर भी प्रेरित कर सकता है, जैसे साइबर अपराध, यौन उत्पीड़न आदि।
सामुदायिक मानकों का उल्लंघन
सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा बनाए गए सामुदायिक मानकों (Community Standards) के बावजूद, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और अनुचित सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यह समाज में अवांछित व्यवहार और अपराधों को बढ़ावा देने का काम करता है।
संस्कृति और मूल्यों पर खतरा: अश्लील सामग्री से पारंपरिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास होता है, जिससे समाज में अनैतिकता फैल सकती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी: फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्मों को इस समस्या से निपटने के लिए और अधिक सख्त नीतियों को लागू करने की आवश्यकता है।
कानूनी प्रतिबंध और समाधान
कई देशों में अश्लील सामग्री का उत्पादन, वितरण और प्रसार गैरकानूनी (Illegal) माना जाता है। इसके लिए कठोर दंड (Strict Punishment) का प्रावधान है, लेकिन डिजिटल माध्यमों पर इसकी निगरानी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
सरकारी निगरानी: विभिन्न सरकारें और साइबर सुरक्षा एजेंसियां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
एआई आधारित निगरानी: कई सोशल मीडिया कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग करके आपत्तिजनक सामग्री को पहचानने और हटाने के लिए तकनीकी समाधान अपना रही हैं।
जनता की भूमिका: यूजर्स को भी इस प्रकार की सामग्री की रिपोर्ट (Report) करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए ताकि ऑनलाइन स्पेस सुरक्षित और नैतिक बना रहे।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री की बढ़ती उपस्थिति चिंता का विषय है, जिसे रोकने के लिए सरकारों, टेक कंपनियों और समाज को मिलकर काम करने की जरूरत है। बच्चों और किशोरों के सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए कठोर नियम, प्रभावी मॉनिटरिंग और नैतिक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।









